हल्द्वानी: संकट में ‘महाराज जी की रसोई’; सिलेंडर की किल्लत से 1500 गरीबों के निवाले पर संकट, संचालक बोले- ‘सब बाबा नीब करौरी के भरोसे’
हल्द्वानी (12 मार्च 2026): शहर के व्यस्त इलाकों से लेकर बस स्टेशनों तक कोई भूखा न सोए, इस संकल्प के साथ चल रही ‘रवि रोटी बैंक’ सेवा पर सिलेंडर की आपूर्ति ठप होने का काला साया पड़ गया है। संस्था के संचालक तरुण सक्सेना ने भावुक होते हुए बताया कि अब उनके पास केवल दो दिन का स्टॉक बचा है।
1. सेवा का गणित: ₹5 की थाली और नि:शुल्क सेवा
महाराज जी की रसोई केवल एक भोजनालय नहीं, बल्कि बेसहारा लोगों का सहारा है:
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दैनिक क्षमता: प्रतिदिन लगभग 1500 लोग यहाँ से तृप्त होकर जाते हैं।
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लागत: जो लोग सक्षम हैं, उनसे मात्र ₹5 लिए जाते हैं, जबकि बेसहारा और असमर्थ लोगों को निशुल्क भोजन कराया जाता है।
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कार्यक्षेत्र: दिन में मटर गली स्थित डीके पार्क और रात को रोडवेज स्टेशन व चौराहों पर घूम-घूमकर भोजन वितरण किया जाता है।
2. सिलेंडर संकट: 2018 से जारी सेवा पर ब्रेक का डर
हल्द्वानी में व्यावसायिक सिलेंडरों की कमी ने इस सेवा को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। तरुण सक्सेना का कहना है कि:
“अगर जल्द ही सिलेंडर का इंतजाम नहीं हुआ, तो साल 2018 से अनवरत चल रही यह सेवा रुक जाएगी। हमने सब बाबा नीब करौरी पर छोड़ दिया है, जैसे आज तक उन्होंने रास्ता दिखाया है, आगे भी वही संभालेंगे।”
3. ‘रवि रोटी बैंक’: दोस्ती और शहादत की अनूठी कहानी
इस संस्था का नाम शहर के युवाओं की दोस्ती और सेवा के प्रति समर्पण का प्रतीक है:
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शुरुआत: 2018 में तरुण सक्सेना और रवि यादव ने मिलकर गरीबों को खाना बांटना शुरू किया था।
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दुखद मोड़: अगस्त 2020 (कोरोना काल) में जरूरतमंदों को खाना बांटकर लौटते समय रवि यादव की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई।
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श्रद्धांजलि: अपने दोस्त के संकल्प को जीवित रखने के लिए तरुण और साथियों ने संस्था का नाम ‘रवि रोटी बैंक’ रख दिया।
Snapshot: रवि रोटी बैंक एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
| संचालक | तरुण सक्सेना |
| स्थापना | वर्ष 2018 (पंजीकरण) |
| सेवा का नाम | महाराज जी की रसोई |
| लाभार्थी | प्रतिदिन 1500 (गरीब एवं बेसहारा) |
| ताजा संकट | व्यावसायिक सिलेंडर की आपूर्ति न होना |

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