
राजू अनेजा,काशीपुर। आस्था के मंच से शुरू हुआ भरोसे का खेल आखिरकार करोड़ों की ठगी में बदल गया। धार्मिक जलसों और प्रवचनों के जरिए लोगों का विश्वास जीतने वाले कथित “कादिर बाबा” ने अंधविश्वास का ऐसा जाल बुना कि भोले-भाले ग्रामीण अपनी जीवनभर की जमा पूंजी तक सौंप बैठे। कुछ ही महीनों में आलीशान कोठी खड़ी हो गई, बोलेरो जैसी महंगी गाड़ी आंगन में खड़ी हो गई—और उधर पीड़ितों के घरों में सन्नाटा पसरा रहा।
पूरे प्रकरण का खुलासा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति के निर्देशन में आईटीआई पुलिस की कार्रवाई से हुआ।
जलसों से शुरू हुआ “चमत्कार” का सफर
ग्रामीण इलाकों में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में कादिर बाबा मुख्य अतिथि बनकर पहुंचे। प्रवचन, दुआ और “जिन्नात” की कहानियों के जरिए लोगों का भरोसा जीता गया। फिर शुरू हुई “स्कीमों” की पेशकश—
तय रकम जमा करो, कुछ दिनों में दुगुनी पाओ
मजदूरों, विधवाओं और बच्चियों के नाम पर अलग-अलग योजनाएं
यह दावा कि बाबा पर जिन्नात आता है, जो पैसे डबल कर देता है
धार्मिक आस्था के माहौल में बैठे लोगों को यह सब चमत्कार लगा, और यहीं से भरोसे की सबसे बड़ी लूट शुरू हो गई।
भरोसे की कीमत: करोड़ों की ठगी
जांच में सामने आया कि अलग-अलग गांवों से लाखों-करोड़ों रुपये इकट्ठा किए गए। लोगों को बताया गया कि जिन्नात की “मेहरबानी” से कई सदस्य प्लॉट और गाड़ियां खरीद चुके हैं।
इसी दौरान—
ग्राम धीमरखेड़ा में प्लॉट लेकर आलीशान मकान बनाया गया
बोलेरो जैसी गाड़ी खरीदी गई
अन्य सहयोगियों ने भी प्लॉट और महंगी गाड़ियां लीं
जिस तेजी से संपत्ति बढ़ी, उसने कई लोगों को शक में डाला, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
जब मांगने लगे पैसा, तो मिली धमकी
पीड़ितों ने जब अपनी जमा रकम वापस मांगी, तो उन्हें टालमटोल, गाली-गलौच और जान से मारने की धमकी दी गई। मामला पुलिस तक पहुंचा तो पूरा नेटवर्क बेनकाब हो गया।
कार्रवाई की भनक लगते ही आरोपी उत्तर प्रदेश भाग निकले, लेकिन पुलिस टीम ने जिला रामपुर से धर दबोचा। संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस का सख्त संदेश
एसएसपी अजय गणपति ने स्पष्ट कहा है कि अंधविश्वास और चमत्कार के नाम पर जनता की मेहनत की कमाई लूटने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
सबक जो याद रखना होगा
जहां आस्था के मंच से “रुपये डबल” का वादा हो, वहां सावधानी जरूरी है।
बैंक भी जितना रिटर्न नहीं देते, उससे ज्यादा देने का दावा अगर कोई करे—तो समझिए मामला भरोसे का नहीं, ठगी का है।
काशीपुर में यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि अंधविश्वास के कारोबार पर पुलिस का करारा प्रहार है।
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