लालकुआँ/देहरादून: शैक्षिक सत्र 2024-25 की लंबित छात्रवृत्ति को लेकर 56-लालकुआँ विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट लगातार धरातलीय प्रयास कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने उत्तराखण्ड सरकार के समाज कल्याण एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास को पुनः एक पत्र प्रेषित कर प्रदेश के 43 छात्र-छात्राओं की रुकी हुई छात्रवृत्ति को शीघ्र विधिक रूप से स्वीकृत कराने की पुरजोर मांग की है। छात्रवृत्ति न मिलने से विद्यार्थियों को अपनी आगे की पढ़ाई जारी रखने में गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
पुनः सत्यापन के फेर में फंसा है 43 छात्र-छात्राओं का प्रकरण
विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट को प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न जनपदों के 43 होनहार विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति का प्रकरण पिछले लंबे समय से अटका हुआ है।
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सत्यापन की प्रक्रिया: पत्र में इस बात का स्पष्ट विधिक उल्लेख किया गया है कि इन सभी विद्यार्थियों का मामला तकनीकी रूप से ‘पुनः सत्यापन’ (Re-verification) की प्रक्रिया के अंतर्गत लंबित चल रहा है।
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पढ़ाई हो रही प्रभावित: विभागीय स्तर पर हो रही इस देरी के कारण छात्र-छात्राओं को समय पर आर्थिक सहायता का विधिक लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिससे कॉलेज और शिक्षण संस्थानों की फीस जमा करने में उन्हें भारी परेशानी हो रही है।
मुख्यमंत्री को भी लिखा था पत्र; 1 जून को देहरादून में मंत्री से की थी मुलाकात
गौरतलब है कि विद्यार्थियों के हक की इस लड़ाई को लेकर विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट इससे पूर्व सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भी विधिक पत्र प्रेषित कर चुके हैं। यही नहीं, बीते 1 जून 2026 को विधायक स्वयं राजधानी देहरादून पहुंचे थे और उन्होंने उत्तराखण्ड सरकार के समाज कल्याण एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास से शिष्टाचार मुलाकात कर इस गंभीर विषय पर एक मांग पत्र भी सौंपा था। अब एक बार फिर अनुस्मारक पत्र प्रेषित कर मंत्री से छात्रों के व्यापक हित में त्वरित और विधिक कार्रवाई करने का विशेष अनुरोध किया गया है।
आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की शिक्षा न रुके: डॉ. मोहन सिंह बिष्ट
विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि जो बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं, उनकी उच्च शिक्षा धन के अभाव में किसी भी सूरत में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए आवश्यक है कि समाज कल्याण विभाग के अधिकारी लंबित छात्रवृत्ति का विधिक समय-सीमा के भीतर जल्द से जल्द निस्तारण करें। उन्होंने शासन स्तर से संबंधित विभागीय उच्चाधिकारियों को आवश्यक विधिक निर्देश जारी कर छात्रवृत्ति की धनराशि शीघ्र छात्र-छात्राओं के खातों में अंतरित (डीबीटी) कराने की मांग की है।
विधायक के इस निरंतर और मजबूत प्रयास के बाद अब प्रभावित विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों में एक नई उम्मीद जगी है कि जल्द ही तकनीकी विधिक अड़चनें दूर होंगी और छात्रों को उनके हक की छात्रवृत्ति प्राप्त हो सकेगी।
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