
नैनीताल। उत्तराखंड राज्य के हितों के मुखर पैरोकार और नैनीताल के पूर्व विधायक डॉ. नारायण सिंह जंतवाल (66 वर्ष) का आकस्मिक निधन हो गया है। उनके निधन की दुखद सूचना मिलते ही नैनीताल समेत पूरे प्रदेश के राज्य आंदोलनकारियों, राजनीतिक दलों और विभिन्न जनसंगठनों में शोक की लहर दौड़ गई है। दिवंगत डॉ. जंतवाल अपने पीछे पत्नी—कुमाऊं विश्वविद्यालय में प्रोफेसर सावित्री जंतवाल—तथा दो पुत्रियां छोड़ गए हैं।
रूटीन जांच के दौरान दिल्ली में पड़ा दिल का दौरा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, डॉ. नारायण सिंह जंतवाल अपनी नियमित स्वास्थ्य जांच (रूटीन चेकअप) के सिलसिले में दिल्ली गए हुए थे। इसी दौरान उन्हें अचानक दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ा, जो उनके लिए घातक साबित हुआ। उनके निधन के बाद पार्थिव शरीर को दिल्ली से नैनीताल लाया जा रहा है, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
छात्र राजनीति से लेकर उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अग्रणी नेता तक का सफर
डॉ. नारायण सिंह जंतवाल का सार्वजनिक जीवन संघर्ष और जनसेवा से परिपूर्ण रहा है। वे डी.एस.बी. परिसर नैनीताल में छात्र राजनीति के दौरान छात्रसंघ के उप सचिव, सचिव, अध्यक्ष और छात्रमहासंघ के अध्यक्ष पद पर रहे।
उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) के संस्थापक सदस्यों में शामिल डॉ. जंतवाल ने अलग राज्य के निर्माण के लिए चले आंदोलनों में अग्रणी भूमिका निभाई और इस दौरान जेल भी गए। राज्य गठन के बाद वर्ष 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में वे नैनीताल सीट से विधायक चुने गए थे। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में उक्रांद के केंद्रीय अध्यक्ष और संरक्षक जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया।
इसके अलावा, ‘नशा नहीं रोजगार दो’ अभियान, वनाधिकार आंदोलन तथा क्षेत्रीय जनमुद्दों से जुड़े तमाम आंदोलनों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही। हाल ही में वे उत्तराखंड क्रांति दल द्वारा गैरसैंण को पूर्ण राजधानी बनाए जाने की मांग को लेकर निकाली गई यात्रा में गैरसैंण, चौखुटिया और द्वाराहाट समेत विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से शामिल हुए थे।
राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर
डॉ. जंतवाल के निधन पर पूर्व सांसद महेंद्र पाल, पूर्व पालिकाध्यक्ष मुकेश जोशी, दर्जा राज्य मंत्री शांति मेहरा, नैनीताल विधायक सरिता आर्य, पूर्व विधायक संजीव आर्य सहित तमाम राजनीतिक व सामाजिक हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। नेताओं ने उनके निधन को उत्तराखंड राज्य और जन आंदोलनों के लिए एक ‘अपूर्णीय क्षति’ करार दिया है।