उत्तराखंड: गोल्डन कार्ड धारकों के लिए नई व्यवस्था; बिना मरीज के फीडबैक नहीं होगा अस्पतालों का भुगतान

खबर शेयर करें -

देहरादून: राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने प्रदेश के सूचीबद्ध निजी और सरकारी अस्पतालों के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब गोल्डन कार्ड के तहत उपचार कराने वाले प्रत्येक लाभार्थी को डिस्चार्ज के समय एक विस्तृत फीडबैक फॉर्म भरना होगा। इसके बिना अस्पताल अपने चिकित्सा दावों (Claims) का भुगतान प्राप्त नहीं कर सकेंगे।

क्यों लिया गया यह निर्णय?

राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अध्यक्ष अरविंद सिंह ह्यांकी ने शुक्रवार को योजना की समीक्षा के दौरान यह कदम उठाया। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • पारदर्शिता का अभाव: अक्सर मरीजों को यह पता नहीं चल पाता था कि उनके इलाज पर कुल कितना खर्च हुआ, कौन सी जांचें हुईं और कौन सी दवाइयां दी गईं।

  • बकाया भुगतान का संकट: वर्तमान में प्राधिकरण को निजी अस्पतालों के 100 करोड़ रुपये से अधिक के दावों का भुगतान करना है। दावों की सत्यता जांचने के लिए फीडबैक को आधार बनाया गया है।

  • आयुष्मान योजना की तर्ज पर: जिस तरह आयुष्मान भारत और अटल आयुष्मान योजना में फीडबैक लिया जाता है, अब वही मॉडल गोल्डन कार्ड पर भी लागू होगा।

यह भी पढ़ें 👉  काशीपुर में कांग्रेस का हल्ला बोल: रुद्रपुर की घटना पर गरजी कांग्रेस, 7 सूत्रीय मांगपत्र सौंपकर किया तहसील घेराव

फीडबैक फॉर्म में क्या होगा खास?

अस्पताल को फॉर्म में स्पष्ट रूप से निम्नलिखित जानकारियों का उल्लेख करना होगा:

  1. कैशलेस उपचार की पुष्टि: क्या मरीज को पूरी तरह मुफ्त इलाज मिला?

  2. खर्च का ब्योरा: इलाज में इस्तेमाल दवाइयों, की गई जांचों और कुल व्यय का विवरण।

  3. संतुष्टि रेटिंग: उपचार की गुणवत्ता और अस्पताल की सेवाओं पर मरीज की राय।

  4. सत्यापन: प्राधिकरण के अधिकारी रैंडम आधार पर मरीजों को फोन कर फॉर्म में दी गई जानकारी की पुष्टि भी करेंगे।

यह भी पढ़ें 👉  लालकुआं: 85 करोड़ के 'हाई-टेक' मिल्क प्लांट का औचक निरीक्षण; निदेशक जोशी ने परखी गुणवत्ता, जल्द शुरू होगा संचालन

गोल्डन कार्ड योजना: एक नजर में (Statistics)

विवरण आंकड़े
कुल कार्ड धारक 5.16 लाख (कर्मचारी एवं पेंशनर्स)
कुल लाभार्थी (IPD) 1.73 लाख मरीज
अब तक कुल खर्च (IPD) ₹641 करोड़ से अधिक
ओपीडी (OPD) खर्च ₹300 करोड़ (1.83 लाख दावे)
वर्तमान बकाया ₹100 करोड़ (निजी अस्पतालों का)
यह भी पढ़ें 👉  बेरीपड़ाव में दर्दनाक हादसा: डंपर की चपेट में आने से स्कूटी सवार युवक की मौत, युवती गंभीर घायल

लाभार्थियों को सीधा फायदा

इस नई व्यवस्था से अस्पतालों द्वारा किए जाने वाले अतिरिक्त बिलिंग या अनावश्यक जांचों पर रोक लगेगी। साथ ही, मरीजों को उनके इलाज के दौरान हुए खर्चों की पूरी जानकारी “डिस्चार्ज समरी” के साथ स्पष्ट रूप से मिल सकेगी। प्राधिकरण ने साफ किया है कि हस्ताक्षरयुक्त फीडबैक फॉर्म के बिना किसी भी दावे पर विचार नहीं किया जाएगा।

Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad