बागेश्वर में वनाग्नि का तांडव: कलेक्ट्रेट के सामने धू-धूकर जले जंगल; वन्यजीवों ने गाँवों की ओर किया रुख, ग्रामीणों में दहशत
बागेश्वर: उत्तराखंड के पहाड़ों में सर्दियों के दौरान भी जंगलों की आग थमने का नाम नहीं ले रही है। बागेश्वर जिले में मंगलवार को अराजक तत्वों द्वारा लगाई गई आग ने विकराल रूप ले लिया, जिससे न केवल वन संपदा को भारी नुकसान पहुँचा है, बल्कि अब वन्यजीवों के गाँवों में घुसने से ग्रामीण क्षेत्रों में खतरा बढ़ गया है।
📍 कहाँ-कहाँ भड़की आग?
मंगलवार को जिले के दो मुख्य वन क्षेत्रों में आगजनी की घटना सामने आई:
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कलेक्ट्रेट क्षेत्र: कलेक्ट्रेट के ठीक सामने स्थित आरएफसी (RFC) गोदाम के ऊपर के जंगल में आग भड़क उठी।
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त्यूंरा-जौलकांडे: त्यूनरा के ऊपर जौलकांडे की ओर स्थित वन क्षेत्र भी आग की चपेट में आने से घंटों धू-धूकर जलता रहा।
🐾 वन्यजीवों का पलायन और ग्रामीण दहशत
जंगलों में लगी भीषण आग के कारण वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो गया है, जिससे वे सुरक्षित स्थानों की तलाश में आबादी क्षेत्रों की ओर आ रहे हैं:
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खूंखार जानवरों का डर: ग्रामीणों के अनुसार, गुलदार, भालू और जंगली सूअर जैसे जानवर अब सीधे गाँवों का रुख कर रहे हैं।
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असुरक्षित महसूस कर रहे ग्रामीण: राज्य आंदोलनकारी हेम पंत और स्थानीय निवासी बबलू जोशी ने बताया कि आगजनी से जंगल विनाश की ओर बढ़ रहे हैं और पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुँच रही है।
⚖️ वन विभाग की कार्रवाई और मांग
आग की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुँची और नियंत्रण पाने का प्रयास शुरू किया।
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विभागीय पक्ष: रेंज अधिकारी (RO) केवलानंद पांडे ने बताया कि आग को नियंत्रित करने के लिए टीम जुटी हुई है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
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कड़ी कार्रवाई की मांग: स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि जानबूझकर जंगलों में आग लगाने वाले अराजक तत्वों को चिह्नित कर उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
🛑 पर्यावरण पर असर
दिसंबर माह से ही जिले में आगजनी की छिटपुट घटनाएं सामने आ रही हैं। बिना बारिश और सूखे जैसे हालातों के कारण जंगल की आग तेजी से फैल रही है, जो भविष्य में जल स्रोतों के सूखने और जैव विविधता के खत्म होने का बड़ा कारण बन सकती है।

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