फूलदेई 2026: 15 मार्च को खिलेगी खुशियों की क्यारी; जानें क्या है इस ‘लोक पर्व’ का महत्व और परंपरा
देवभूमि उत्तराखंड के घर-घर की देहरी एक बार फिर फूलों से सजने वाली है। प्रकृति और बच्चों के अटूट प्रेम का प्रतीक ‘फूलदेई’ पर्व इस वर्ष 15 मार्च को पूरे प्रदेश में पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।
1. तिथि का निर्णय: 14 या 15 मार्च?
धार्मिक और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, फूलदेई का पर्व हिंदू कैलेंडर के अनुसार चैत्र संक्रांति के दिन मनाया जाता है।
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मीन संक्रांति: साल 2026 में सूर्य का मीन राशि में प्रवेश (संक्रांति) 15 मार्च को हो रहा है।
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पारंपरिक मान्यता: हालांकि कुछ क्षेत्रों में तिथियों के फेरबदल की चर्चा रहती है, लेकिन सौर पंचांग के अनुसार 15 मार्च को ही आधिकारिक और पारंपरिक रूप से फूलदेई मनाई जाएगी।
2. ‘फूल देई, छम्मा देई’: परंपरा और लोकगीत
यह पर्व बच्चों को समर्पित है, जिन्हें पहाड़ों में ‘देवस्वरूप’ माना जाता है। इस दिन की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
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पुष्प वर्षा: बच्चे सुबह-सुबह टोकरियों में ‘फ्योंली’, ‘बुरांश’ और ‘सरसों’ जैसे जंगली फूल लेकर निकलते हैं।
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देहरी पूजन: बच्चे गाँव के हर घर की देहरी (चौखट) पर फूल चढ़ाते हैं और मंगल कामना करते हैं।
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प्रसिद्ध लोकगीत: देहरी पर फूल चढ़ाते समय बच्चे गाते हैं:
“फूल देई, छम्मा देई, देणी द्वार, भर भकार।”
(अर्थ: घर की देहरी फूलों से भरी रहे, घर में सुख-शांति हो और अन्न के भंडार कभी खाली न हों।)
3. प्रकृति और नववर्ष का स्वागत
पर्वतीय क्षेत्रों में फूलदेई को सौर नववर्ष के स्वागत के रूप में देखा जाता है। यह वह समय है जब:
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प्रकृति का श्रृंगार: पहाड़ों में बर्फ पिघल चुकी होती है और बांज-बुरांश के पेड़ों पर चटख लाल रंग के फूल खिलने लगते हैं।
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सामाजिक समरसता: घर के बड़े-बुजुर्ग बच्चों को उपहार स्वरूप गुड़, चावल और पैसे देते हैं, जिससे समुदाय में आपसी प्रेम बढ़ता है।
Snapshot: फूलदेई 2026 एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
| मुख्य तिथि | 15 मार्च 2026 (चैत्र/मीन संक्रांति) |
| स्थान | संपूर्ण उत्तराखंड (गढ़वाल और कुमाऊँ मंडल) |
| प्रमुख पात्र | नन्हे बच्चे (फूलारी) |
| मुख्य व्यंजन | सई (चावल के आटे का मीठा पकवान) |
| संदेश | प्रकृति का संरक्षण और समृद्धि की कामना |

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