बिंदुखत्ता: राजस्व ग्राम की अधिसूचना के लिए हुंकार; तहसील में प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, ‘सुप्रीम कोर्ट’ जाने के प्रस्ताव का विरोध
लालकुआं (7 मार्च 2026): बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाने के लिए शनिवार को क्षेत्रवासियों ने वन अधिकार समिति और पूर्व सैनिक संगठन के बैनर तले तहसील लालकुआं में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल अधिसूचना जारी करने की मांग की।
विवाद का मुख्य केंद्र: 19 जून 2024 का प्रस्ताव
ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने का दावा जिला स्तरीय वनाधिकार समिति द्वारा 19 जून 2024 को सर्वसम्मति से पारित किया जा चुका है।
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आरोप: समिति का कहना है कि प्रस्ताव पारित होने के बावजूद सरकार अंतिम अधिसूचना जारी नहीं कर रही है।
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उलझाने की आशंका: प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इस मामले को कैबिनेट के जरिए केंद्र को भेजकर सुप्रीम कोर्ट ले जाने की तैयारी कर रही है। समिति के अनुसार, कोर्ट जाने से यह प्रक्रिया और जटिल हो जाएगी और मामला सालों तक लटक सकता है।
समिति का तर्क: अन्य राज्यों और गांवों का उदाहरण
वन अधिकार समिति ने अपने दावे के समर्थन में कुछ महत्वपूर्ण बिंदु रखे हैं:
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बिना अनारक्षण की प्रक्रिया: देश में अब तक लगभग 1600 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम घोषित किया जा चुका है।
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उत्तराखंड के अन्य गांव: राज्य के कई अन्य गांवों में भी बिना वन भूमि अनारक्षित किए ही राजस्व ग्राम का दर्जा दिया गया है, तो बिंदुखत्ता के लिए अलग नियम क्यों?
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उत्तरदायित्व: यदि सरकार के किसी कदम से भविष्य में सुप्रीम कोर्ट में मामला हार जाते हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी उत्तराखंड सरकार और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की होगी।
प्रमुख मांगें और चेतावनी
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तत्काल अधिसूचना: जिला स्तरीय समिति के 19 जून 2024 के फैसले को लागू करते हुए बिंदुखत्ता को तुरंत राजस्व ग्राम घोषित किया जाए।
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आंदोलन की चेतावनी: यदि सरकार ने जल्द ही ठोस निर्णय नहीं लिया, तो क्षेत्र के पूर्व सैनिक और नागरिक बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेंगे।
बिंदुखत्ता मांग: एक नज़र में (Quick Snapshot)
| विवरण | जानकारी |
| मुख्य मांग | राजस्व ग्राम घोषित करने की अधिसूचना |
| प्रस्तावित कानून | वन अधिकार अधिनियम-2006 |
| नेतृत्व | वन अधिकार समिति एवं पूर्व सैनिक संगठन |
| प्रमुख चिंता | मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाने का सरकारी प्रस्ताव |
| अगला कदम | सरकार के जवाब का इंतज़ार, अन्यथा उग्र आंदोलन |

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