“शिक्षा के मंदिर में शर्मनाक तस्वीर—बारिश में भीगते स्कूल आये मासूम को मासाब ने किताब की जगह थमा दिया सिलेंडर”

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राजू अनेजा,रुद्रपुर। मुख्यमंत्री धामी के गृह जिले में शुक्रवार को एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। जिस उम्र में बच्चों के हाथ में किताबें होनी चाहिए, उसी उम्र में एक मासूम छात्र को गैस सिलेंडर की लाइन में खड़ा कर दिया गया। हैरानी की बात यह रही कि यह सब भरी बारिश के बीच हुआ।
रुद्रपुर रम्पुरा क्षेत्र के एक प्राथमिक विद्यालय का कक्षा पांच का छात्र परीक्षा देने के बाद सीधे गैस एजेंसी पहुंचा। स्कूल ड्रेस में खड़ा यह बच्चा बारिश में भीगते हुए सिलेंडर के लिए अपनी बारी का इंतजार करता रहा। मौके पर मौजूद लोगों को जब इसकी जानकारी हुई तो वे भी हैरान रह गए।
बातचीत में छात्र ने बताया कि वह अपने घर के लिए नहीं, बल्कि स्कूल में बनने वाले मिड-डे मील के लिए सिलेंडर लेने आया है। स्कूल में गैस खत्म होने के बाद शिक्षकों ने खुद आने के बजाय छात्र को ही भेज दिया।
यह घटना कई सवाल खड़े करती है—क्या स्कूलों में अब बच्चों से ऐसे काम लेना आम हो गया है? क्या जिम्मेदारों को बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की कोई चिंता नहीं रह गई है?
बारिश में भीगते इस छात्र की तस्वीर ने न केवल व्यवस्था की लापरवाही उजागर की, बल्कि यह भी दिखाया कि कैसे मासूमों पर जिम्मेदारियों का बोझ डाला जा रहा है।
मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी हरेंद्र मिश्रा ने अनभिज्ञता जताई है। उनका कहना है कि यदि ऐसा हुआ है तो यह गंभीर मामला है और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
कटाक्ष:
जब जिम्मेदार ही जिम्मेदारी से बचने लगें, तो बोझ आखिर मासूम कंधों पर ही आता है…

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