
लालकुआं। उत्तराखंड सरकार भले ही प्रदेश को पूर्ण साक्षर राज्य बनाने का दावा कर रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर सरकारी स्कूलों की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। लालकुआं रेलवे के वार्ड नंबर 7 में वर्ष 1955 से संचालित राजकीय प्राथमिक विद्यालय आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है, जहां शिक्षा ग्रहण कर रहे 131 छात्र-छात्राएं जर्जर भवन, टपकती छत और परिसर में भारी जलभराव के बीच पढ़ाई करने को विवश हैं। विद्यालय में मात्र दो पक्के कमरे हैं जिन पर टिन की छत डली है, जबकि बरामदा और मिड-डे मील कक्ष का टिनशेड पूरी तरह सड़ चुका है और जंग लगने से कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। इसके अलावा, मुख्य गेट न होने के कारण शाम के समय परिसर में असामाजिक तत्वों, जुआरियों और नशेडियों का जमावड़ा लगा रहता है तथा हाल ही में चोरों ने स्कूल का ताला तोड़कर मिड-डे मील के बर्तन, राशन और चहारदीवारी निर्माण के लिए लाई गई सरिया तक चोरी कर ली।
इस संवेदनशील मुद्दे पर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हेमवती नंदन दुर्गापाल ने गहरा रोष व्यक्त करते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया और कहा कि 21st Century में भी नौनिहालों का जंग लगे जर्जर टिनशेड के नीचे जान जोखिम में डालकर पढ़ना शर्मनाक है, जिसने सरकार के साक्षरता के दावों की पोल खोल दी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द नए भवन का निर्माण कर परिसर को सुरक्षित नहीं बनाया गया तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन किया जाएगा। दूसरी ओर, मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर पंचायत अध्यक्ष सुरेंद्र लोटनी ने बताया कि विद्यालय की बाउंड्री वॉल बनाने और नाले को कवर करने के लिए 22 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं तथा मुख्य गेट का निर्माण भी कराया जा रहा है, वहीं प्रधानाचार्या डॉ. शालिनी पांडे ने कहा कि परिसर की समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों को प्रस्ताव भेजा जा चुका है।