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धामी की पैनी नजरों से नहीं बच पाया गदरपुर तहसील में फर्जीवाड़ा! दो युवकों से छह घंटे की पूछताछ के बाद खुलती गईं फर्जीवाड़े की परतें, काशीपुर-गदरपुर-रुद्रपुर तक जुड़े तार

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राजू अनेजा, गदरपुर। गदरपुर तहसील में फर्जी जाति और निवास प्रमाण पत्र तैयार कराने के कथित खेल का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। तहसीलदार लीना चंद्रा धामी की पैनी नजर और दस्तावेजों की गहन जांच के चलते फर्जीवाड़े की परतें खुलनी शुरू हो गई हैं। प्रारंभिक जांच में कई दस्तावेज संदिग्ध पाए जाने के बाद दो युवकों को तहसील परिसर में घंटों पूछताछ के बाद पुलिस के सुपुर्द किया गया। मामले की जांच आगे बढ़ने पर अब 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

संदेह हुआ तो तहसीलदार ने खंगाल डाले दस्तावेज

बताया जा रहा है कि गदरपुर क्षेत्र के दो युवक लंबे समय से कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जाति और निवास प्रमाण पत्र बनवाने का प्रयास कर रहे थे। प्रमाण पत्रों के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों में गड़बड़ी की आशंका होने पर तहसीलदार लीना चंद्रा धामी ने मामले को गंभीरता से लिया और अभिलेखों की बारीकी से जांच शुरू कराई।

जांच आगे बढ़ी तो कई प्रमाण पत्र और उनके साथ लगाए गए दस्तावेज संदेह के घेरे में आ गए। इसके बाद प्रशासन ने दोनों युवकों को तहसील परिसर में बुलाकर पूछताछ शुरू की।

छह घंटे तक चली पूछताछ, फिर पुलिस के हवाले

दोनों युवकों से करीब छह घंटे तक लगातार पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने प्रमाण पत्रों, आवेदन पत्रों और उनके साथ लगाए गए दस्तावेजों के संबंध में जानकारी हासिल की। पूछताछ में सामने आए तथ्यों और मिले सुरागों के बाद मामले को महज कागजी गड़बड़ी न मानते हुए पुलिस कार्रवाई के लिए आगे बढ़ाया गया।

एसडीएम अमृता शर्मा के निर्देश पर दोनों युवकों को पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी।

तहसील की सील और हस्ताक्षर तक जांच के घेरे में

मामले की प्रारंभिक जांच में कुछ प्रमाण पत्रों पर तहसील की सील और कथित फर्जी हस्ताक्षर होने की बात सामने आई है। यदि जांच में इसकी पुष्टि होती है तो मामला और गंभीर हो सकता है, क्योंकि इसमें सरकारी अभिलेखों और अधिकारियों की मुहर व हस्ताक्षर के कथित दुरुपयोग का पहलू भी जुड़ जाएगा।

प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि संदिग्ध दस्तावेज तैयार करने के लिए सामग्री कहां से जुटाई गई और प्रमाण पत्र हासिल करने की कोशिश में किन लोगों की भूमिका रही।

दस से अधिक प्रमाण पत्रों की जांच से बढ़ी हलचल

सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान दस से अधिक संदिग्ध प्रमाण पत्र सामने आने की आशंका है। इन सभी दस्तावेजों की सत्यता की जांच की जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर संबंधित अभिलेखों से उनका मिलान कराया जा रहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कौन से दस्तावेज वास्तविक हैं और किनमें कथित रूप से कूटरचना की गई है।

जांच बढ़ी तो काशीपुर-गदरपुर-रुद्रपुर तक पहुंचे तार

मामले की आगे की जांच में प्रकरण का दायरा बढ़ता नजर आया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अब काशीपुर, गदरपुर और रुद्रपुर क्षेत्र से जुड़े 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इन लोगों की कथित भूमिका क्या रही और फर्जी दस्तावेजों के जरिए प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में कौन-कौन शामिल था।

मुकदमे में नाम सामने आना अपराध सिद्ध होना नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका पुलिस जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।

मोबाइल रिकॉर्डिंग और दस्तावेज भी जांच की अहम कड़ी

जांच के दौरान दोनों युवकों के मोबाइल फोन में मामले से संबंधित रिकॉर्डिंग और दस्तावेज मिलने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस अब इन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। रिकॉर्डिंग और दस्तावेजों से यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि प्रमाण पत्र तैयार कराने के लिए किससे संपर्क किया गया और कथित फर्जीवाड़े की प्रक्रिया में कौन-कौन लोग जुड़े थे।

एक प्रमाण पत्र से शुरू हुई जांच, खुलती गईं परतें

मामले की खास बात यह है कि जांच की शुरुआत दस्तावेजों में संदेह से हुई, लेकिन जैसे-जैसे तहसील प्रशासन ने अभिलेखों की पड़ताल आगे बढ़ाई, वैसे-वैसे कई अन्य दस्तावेज भी जांच के दायरे में आते गए।

यही वजह है कि अब प्रशासन और पुलिस दोनों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कथित फर्जी प्रमाण पत्रों का यह मामला केवल कुछ आवेदनों तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था।

अब जांच का केंद्र—कहां बने दस्तावेज और किसने तैयार किए?

पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि कथित फर्जी दस्तावेज तैयार किसने किए? इन दस्तावेजों पर तहसील की कथित सील और हस्ताक्षर कैसे पहुंचे? आवेदन प्रक्रिया में इनका सत्यापन किस स्तर पर हुआ और प्रमाण पत्र बनवाने के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था?

इन सवालों के जवाब पुलिस जांच में सामने आने हैं।

एसडीएम की निगरानी में कार्रवाई, प्रशासन सख्त

एसडीएम अमृता शर्मा के निर्देश के बाद दोनों युवकों को पुलिस के सुपुर्द किया जाना प्रशासन की गंभीरता को दर्शाता है। तहसील प्रशासन अब संदिग्ध दस्तावेजों का सत्यापन कराने के साथ पूरे प्रकरण से जुड़े अभिलेखों को खंगाल रहा है।

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी प्रमाण पत्र हासिल करने अथवा उनका इस्तेमाल करने की पुष्टि होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

धामी की पैनी नजर ने खोली पहली परत, अब जांच बताएगी फर्जीवाड़े की गहराई

गदरपुर तहसील में सामने आए इस प्रकरण ने सरकारी प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि तहसीलदार लीना चंद्रा धामी की सतर्कता से संदिग्ध दस्तावेजों की समय रहते जांच शुरू हुई और मामला पुलिस तक पहुंचा।

अब देखना यह है कि दो युवकों से शुरू हुई यह जांच 10 नामजद लोगों तक पहुंचने के बाद और कितनी परतें खोलती है और कथित फर्जी प्रमाण पत्रों के इस खेल में आगे किन-किन लोगों के नाम सामने आते हैं।

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