राष्ट्रपति भवन में ‘हिमालयी स्वाद’ का जादू: जखिया आलू और झंगोरा की खीर के मुरीद हुए यूरोपीय संघ के नेता

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नई दिल्ली: राष्ट्रपति भवन में मंगलवार को आयोजित एक भव्य राजकीय भोज (State Banquet) ने भारत की समृद्ध हिमालयी विरासत को वैश्विक पटल पर रख दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा यह भोज गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि—यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के सम्मान में दिया गया।

🍽️ कश्मीर से पूर्वोत्तर तक: मेन्यू में दिखा ‘पहाड़ी’ जायका

भोज का मेन्यू शेफ प्रतीक साधु और शेफ कमलेश नेगी के सहयोग से तैयार किया गया था। इसमें कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और विशेष रूप से उत्तराखंड के पारंपरिक स्वादों को आधुनिक अंदाज में परोसा गया।

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भोज की प्रमुख झलकियां:

  • उत्तराखंड का तड़का: शुरुआत उत्तराखंड के प्रसिद्ध ‘जखिया आलू’ (पीले जखिया के बीज से तड़के हुए) और ‘सुंदरकला थिचोनी’ (बकव्हीट नूडल्स सूप) से हुई।

  • स्थानीय सामग्री: याक चीज, भांग की मठरी, और बिच्छू बूटी के पत्तों का अनूठा प्रयोग किया गया।

  • मुख्य व्यंजन: हिमाचल के मशरूम, सोलन मशरूम, और कश्मीरी अखरोट के साथ पारंपरिक ‘स्वर्णु चावल’ परोसे गए।

  • मिठाई: हिमालयी रागी, तिमरू (पहाड़ी मसाला), और झंगोरा की खीर ने मेहमानों का दिल जीत लिया।


🤝 कूटनीति की नई ऊंचाई: “मदर ऑफ ऑल डील्स”

यह डिनर केवल भोजन तक सीमित नहीं था, बल्कि भारत-ईयू संबंधों के एक नए युग का प्रतीक बना।

  1. ऐतिहासिक FTA: इसी दिन भारत और यूरोपीय संघ के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर सहमति बनी। अधिकारियों ने इसे व्यापार की दुनिया की सबसे बड़ी डील करार दिया।

  2. साझा दृष्टिकोण: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईयू नेताओं ने रक्षा, व्यापार और वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक व्यापक सहयोग एजेंडा पेश किया।

  3. अभूतपूर्व अतिथि: यह इतिहास में पहली बार था जब यूरोपीय संघ के दो सबसे शक्तिशाली पदों पर बैठे नेता एक साथ भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल हुए।

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📋 राजकीय भोज का ‘हिमालयी’ कार्ड

कोर्स व्यंजन की विशेषता
स्टार्टर जखिया आलू, भांग मठरी, बिच्छू बूटी पत्ता।
सूप सुंदरकला थिचोनी (उत्तराखंडी बकव्हीट नूडल्स)।
मेन कोर्स गुच्छी मशरूम, हिमाचली स्वर्णु चावल, अखुनी चटनी।
डेजर्ट झंगोरा की खीर, तिमरू-सी बकथॉर्न क्रीम, रागी केक।
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