
राजू अनेजा ,रुद्रपुर/नई दिल्ली। उत्तराखंड की सियासत में लंबे समय से चल रही अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया। पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने आज दिल्ली में औपचारिक रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का दामन थाम लिया। कभी भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेताओं में शुमार रहे ठुकराल का यह कदम प्रदेश की राजनीति में बड़ा सियासी संदेश माना जा रहा है।
‘घर वापसी’ के इंतजार से ‘नई राह’ तक
आपको बताते चले कि 2022 के विधान सभा चुनाव में टिकट न मिलने पर भाजपा से बागी होकर निर्दलीय रूप से चुनाव लड़ने के बाद से ठुकराल राजनीतिक वनवास झेल रहे थे। उन्हें उम्मीद थी कि मां के समान पार्टी उन्हें एक बार फिर अपनाएगी, लेकिन लंबे इंतजार के बाद जब ‘मां’ समान पार्टी से हरी झंडी नहीं मिली, तो उन्होंने सियासी पाला बदलने का फैसला कर लिया। आज दिल्ली में कांग्रेस की सदस्यता लेकर उन्होंने साफ कर दिया कि अब उनकी लड़ाई नए मंच से होगी।
रुद्रपुर सीट पर मजबूत दावेदारी
सूत्रों के मुताबिक, ठुकराल की नजर अब रुद्रपुर विधानसभा सीट पर है। कांग्रेस में शामिल होते ही उनकी दावेदारी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें मैदान में उतारकर बड़ा दांव खेल सकती है।
पार्टी ने मौका दिया तो सीट जीत कर दखाएंगे
कांग्रेस में शामिल होते ही ठुकराल ने तेवर भी दिखा दिए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वे चुनाव मैदान में उतरकर विरोधियों को धूल चटाएंगे” और भारी मतों से जीत दर्ज करेंगे। उनका यह बयान सियासी गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
बदलेगा अंदाज या बढ़ेगी चुनौती?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा में रहते हुए अपने बयानों के चलते अक्सर विवादों में रहने वाले ठुकराल के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक को साधने की होगी। यह उनके लिए करो या मरो की स्थिति से कम नहीं है।
राजकुमार ठुकराल ने सियासत की नई पारी तो शुरू कर दी है, लेकिन यह राह आसान नहीं होगी। अब नजर इस बात पर टिकी है कि क्या वे कांग्रेस में अपनी नई पहचान बना पाते हैं या फिर सियासी दांव उल्टा पड़ता है।

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