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उत्तराखंड क्रांति दल ने हल्द्वानी में मनाया ‘काला दिवस’, शहीदों के सपनों का राज्य न बनने पर रोष

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हल्द्वानी (नैनीताल): उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) ने 2 अक्टूबर 2025 को गांधी जयंती के अवसर पर बुद्ध पार्क, हल्द्वानी में धरना-प्रदर्शन कर ‘काला दिवस’ मनाया। पार्टी ने इस दौरान उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए और राज्य निर्माण के मूल उद्देश्य अब तक पूरे न होने पर गहरा रोष व्यक्त किया।


 

शहीदों के सपनों को पूरा न करने पर सरकारों पर हमला

 

धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व UKD नैनीताल के जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह चौहान ने किया। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के 25 वर्ष बीत जाने के बाद भी शहीदों के सपनों का राज्य नहीं बन पाया है।

  • अधूरे उद्देश्य: चौहान ने आरोप लगाया कि अभी तक बनी तमाम सरकारों ने राज्य के निवासियों को आहत किया है, और राज्य की राजधानी का मुद्दा, बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा, तथा रोटी-रोजगार का मुद्दा अभी तक अधर में लटके हुए हैं।
  • न्याय की मांग: उन्होंने कहा कि राज्य के संघर्षशील लोगों के साथ अन्याय करने वालों को आज तक सजा नहीं मिली है।
  • UKD का संकल्प: उन्होंने दोहराया कि अगर उत्तराखंड क्रांति दल सत्ता में आता है, तो वह शहीदों के सपनों के अनुरूप राज्य बनाने के लिए कार्य करेगा और पर्वतीय इलाकों के लिए प्रकृति संरक्षण के अनुरूप नीतियों को क्रियान्वित करेगा।

 

पलायन और स्थानीय अधिकारों की उपेक्षा पर चिंता

 

वरिष्ठ आंदोलनकारी भुवन जोशी ने कहा कि राज्य का मूल स्वरूप भावनाओं के विपरीत बनाने की कोशिश करने वाले राजनैतिक दलों को जनता के बीच बेनकाब करना ज़रूरी है।

जनमैत्री संगठन नैनीताल के बची सिंह बिष्ट ने महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज्य के विचार के अनुसार राज्य के गठन की मांग की उपेक्षा पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज जब पूरा पर्वतीय उत्तराखंड पलायन, वन्य जीवों के आक्रमण और भूमि, जल, जंगल पर स्थानीय अधिकारों की कमी से जूझ रहा है, ऐसे वक्त में सभी लोगों को एकजुट होकर सम्मान पूर्वक जीने का अवसर देने वाला राज्य बनाने की आवश्यकता है।

इस धरना प्रदर्शन में यूकेडी जिलाध्यक्ष प्रताप चौहान, भुवन जोशी, केंद्रीय संगठन मंत्री भुवन सिंह बिष्ट, कैप्टन महेश तिवाड़ी, पार्टी संस्थापक खड्ग सिंह बगड़वाल, प्रदीप कोठारी, सुरेश जोशी, महेंद्र नेगी, गोविंद ग़सियाल सहित अनेक आंदोलनकारी और यूकेडी के सदस्य शामिल रहे।

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