उत्तराखंड की नई आवास नीति: शहरों की ‘धारण क्षमता’ और सतत विकास पर रहेगा जोर
देहरादून: राज्य सरकार 2017 की पुरानी आवास नीति की जगह अब नई नीति लागू करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य शहरीकरण के दबाव को कम करना और पर्वतीय क्षेत्रों के संवेदनशील पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए किफायती आवास उपलब्ध कराना है।
📉 कैरिंग कैपेसिटी (धारण क्षमता) का अध्ययन
सचिव आवास ने स्पष्ट किया कि अब अंधाधुंध निर्माण के बजाय वैज्ञानिक आधार पर विकास होगा:
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प्राथमिकता: चारधाम क्षेत्र, प्रमुख तीर्थस्थल और संवेदनशील पर्वतीय नगर।
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उद्देश्य: यह अध्ययन बताएगा कि किसी शहर की जमीन, जल स्रोत और बुनियादी ढांचा कितने लोगों का बोझ सह सकता है।
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ड्राफ्ट चर्चा: कैरिंग कैपेसिटी असेसमेंट स्टडी के ड्राफ्ट पर चर्चा पूरी हो चुकी है, इसे जल्द ही धरातल पर उतारा जाएगा।
🏗️ प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY 1.0 और 2.0)
बैठक में पीएम आवास योजना की प्रगति की समीक्षा की गई:
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समय-सीमा: निर्माण, स्वीकृति और आवंटन की सभी प्रक्रियाओं को एक निश्चित समय के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
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जरूरतमंदों को लाभ: सचिव ने कहा कि योजना का मुख्य लक्ष्य शहरी गरीबों को समय पर छत उपलब्ध कराना है, इसमें किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
🏢 विकास प्राधिकरणों (MDDA और HRDA) के लिए निर्देश
सचिव ने देहरादून और हरिद्वार विकास प्राधिकरणों के लंबित कार्यों पर नाराजगी जताते हुए तेजी लाने को कहा:
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MDDA (मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण): आवासीय परियोजनाओं में लॉटरी और आवंटन की प्रक्रिया को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने के निर्देश।
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HRDA (हरिद्वार विकास प्राधिकरण): लंबित विकास कार्यों और बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा गया।
📋 नई आवास नीति की मुख्य विशेषताएं (प्रस्तावित)
| फोकस क्षेत्र | विवरण |
| पर्वतीय भूगोल | पहाड़ों की कठिन परिस्थितियों के अनुकूल निर्माण तकनीक। |
| किफायती आवास | कम आय वर्ग (LIG) के लिए सस्ते और सुलभ घर। |
| पर्यावरणीय संतुलन | ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट और सतत विकास को महत्व। |
| डिजिटलीकरण | आईटी और एमआईएस के माध्यम से प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाना। |
👥 बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी
बैठक में आवास एवं शहरी विकास के विशेष सचिव, निदेशक आवास रजनीश जैन, अपर सचिव राहुल सुंदरियाल, और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ जैसे रोहित रंजन (हाउसिंग), कामना करण (संस्थागत सुधार) और सचिन नौटियाल (IT विशेषज्ञ) मौजूद रहे।

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