
राजू अनेजा, काशीपुर।काशीपुर में महाशिवरात्रि पर्व के मद्देनजर मांस बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध के बीच आरओबी पर मांस के टुकड़े और मुर्गियों के पंजे मिलने से हड़कंप मच गया। घटना ने नगर निगम की सख्ती और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नगर निगम प्रशासन ने 11 से 15 फरवरी तक धार्मिक आस्था को देखते हुए कच्चे और पके मांस की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध के आदेश जारी किए थे। इसके बावजूद बृहस्पतिवार सुबह करीब 10:30 बजे महाराणा प्रताप चौक स्थित आरओबी पर तिराहे के पास एक थैले से मांस के टुकड़े और मुर्गे के पंजे बिखरे पाए गए। प्रतिबंध के बीच इस तरह की घटना ने लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया।
सोशल मीडिया से मिली सूचना, तत्काल सफाई
घटना की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से नगर प्रशासन तक पहुंची। नगर आयुक्त रविंद्र सिंह बिष्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत पर्यावरण मित्रों की टीम को मौके पर भेजा। मांस के टुकड़ों को हटवाकर पूरे क्षेत्र में सफाई कराई गई।
नगर आयुक्त ने कहा कि मामले की सूचना पुलिस को दे दी गई है और जांच कराई जा रही है कि प्रतिबंध के बावजूद मांस वहां तक कैसे पहुंचा।
मेयर हुए सख्त
मेयर दीपक बाली ने घटना को बेहद गंभीर बताते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को फोन पर जानकारी दी। उन्होंने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।मेयर ने कहा कि जब 11 फरवरी से निगम क्षेत्र में मांस की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है, तो इस तरह की घटना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
साजिश या लापरवाही?
घटना ने शहर में दो तरह की चर्चाएं तेज कर दी हैं।
एक पक्ष इसे धार्मिक माहौल बिगाड़ने की साजिश मान रहा है, तो दूसरा पक्ष प्रशासनिक ढिलाई और आदेशों की अनदेखी की ओर इशारा कर रहा है। यदि प्रतिबंध के बावजूद मांस उपलब्ध था, तो निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब निगाहें पुलिस जांच और सीसीटीवी फुटेज पर टिकी हैं।
सवाल सिर्फ मांस के टुकड़ों का नहीं, बल्कि प्रशासनिक आदेशों की विश्वसनीयता और शहर की शांति का है।
क्या यह किसी की शरारत थी या आदेशों की खुली अवहेलना?
जवाब आने तक काशीपुर में चर्चा और सियासी गर्मी दोनों बरकरार हैं।
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