सिस्टम हुआ बेनकाब तो बौखलाया प्रशासन, गैस किल्लत की खबर छापने पर पत्रकार पर ठोका मुकदमा

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राजू अनेजा,लालकुआं/खटीमा।जनता की आवाज उठाना क्या अब गुनाह बन गया है? खटीमा के पत्रकार दीपक फुलेरा पर दर्ज मुकदमे ने पूरे प्रदेश के पत्रकारों को सड़कों पर ला दिया है। उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के बैनर तले लालकुआं में पत्रकारों का गुस्सा फूट पड़ा और प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया गया।

पत्रकारों ने साफ शब्दों में कहा—
“अगर सच लिखना अपराध है, तो पत्रकारिता का अस्तित्व ही खतरे में है!”

गैस किल्लत की खबर बनी ‘जुर्म’!

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मामला तब गरमाया जब दीपक फुलेरा ने खटीमा में गैस किल्लत की गंभीर समस्या को अपनी खबर में प्रमुखता से उठाया। उनका मकसद सिर्फ इतना था कि आम जनता को राहत मिले, लेकिन कार्रवाई समस्या पर नहीं, बल्कि पत्रकार पर कर दी गई।इससे आक्रोशित पत्रकारों ने इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला बताया।

मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

लालकुआं में पत्रकारों ने तहसीलदार पूजा शर्मा के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। चेतावनी दी गई कि यदि मुकदमा तुरंत वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन प्रदेशभर में तेज किया जाएगा।

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“कलम नहीं झुकेगी!”
प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों ने एक सुर में ऐलान किया—
“हम कलम बेचने नहीं, सच लिखने आए हैं… और सच दबाने की हर कोशिश का मुंहतोड़ जवाब देंगे!”
ज्ञापन देने वालों में यूनियन के राष्ट्रीय पार्षद बीसी भट्ट, नगर अध्यक्ष रंजीत बोरा, महामंत्री दीप जोशी, मीडिया प्रभारी सानू हरीश पनेरु, संजय जोशी समेत बड़ी संख्या में पत्रकार शामिल रहे।

बड़ा सवाल
क्या अब जनहित की खबर दिखाना भी अपराध है?
अगर पत्रकार ही डर गए, तो जनता की आवाज कौन उठाएगा?
फिलहाल एक बात साफ है—
उत्तराखंड में पत्रकार अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं… और ये मामला यहीं थमने वाला नहीं!

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