गैरसैंण बजट सत्र: उक्रांद करेगा विधानसभा का घेराव; 26 जिलों का ब्लूप्रिंट और ‘स्थाई राजधानी’ पर सरकार को घेरने की तैयारी
गैरसैंण (8 मार्च 2026): बजट सत्र के आगाज से ठीक पहले उत्तराखंड क्रांति दल ने पहाड़ों की उपेक्षा और राजधानी के मुद्दे पर आक्रामक रुख अपना लिया है। उक्रांद नेता आशीष नेगी गांव-गांव जाकर जनता से समर्थन मांग रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह घेराव केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि राज्य के मूल स्वरूप को बचाने की लड़ाई है।
उक्रांद का ‘विज़न उत्तराखंड’ और प्रमुख चुनावी वादे
आगामी 2027 के चुनावों को देखते हुए उक्रांद ने अपने एजेंडे को जनता के सामने रखा है:
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स्थाई राजधानी: उक्रांद की सरकार बनते ही पहली कैबिनेट में गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थाई राजधानी घोषित किया जाएगा।
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नया प्रशासनिक ढांचा: * राज्य में 26 नए जिलों का गठन किया जाएगा।
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कुमाऊं और गढ़वाल मंडल में एक-एक नई कमिश्नरी बनाई जाएगी।
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परिसीमन और भू-कानून: भौगोलिक आधार पर परिसीमन लागू कर विधायकों की संख्या 100 से अधिक की जाएगी। साथ ही, ‘मूल निवास’ और सख्त ‘भू-कानून’ को प्राथमिकता से लागू करने का वादा किया गया है।
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बूथ स्तर पर पकड़: राज्य के 11,524 बूथों में से अब तक 3,700 बूथों पर उक्रांद ने अपनी सक्रिय टीमें तैनात कर दी हैं।
सत्तापक्ष और विपक्ष पर तीखा हमला
आशीष नेगी ने भाजपा और कांग्रेस दोनों पर उत्तराखंड की भावनाओं से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया:
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पहाड़ की पीड़ा: उन्होंने कटाक्ष किया कि सत्तापक्ष के विधायक गैरसैंण में ‘ठंड’ और ‘ऑक्सीजन की कमी’ का बहाना बनाते हैं, जबकि पहाड़ की महिलाएं बर्फबारी में भी जंगलों से चारा लाती हैं।
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पलायन और सीटें: उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पहाड़ की शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को नहीं सुधारा गया, तो भविष्य में पर्वतीय क्षेत्रों की विधानसभा सीटें घट जाएंगी और पहाड़ का राजनीतिक अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
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दलों का अदल-बदल: नेगी ने तंज कसा कि वर्तमान भाजपा सरकार में अधिकांश मंत्री पूर्व में कांग्रेसी रहे हैं, जिससे स्पष्ट है कि दोनों दल एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
घेराव कार्यक्रम: एक नज़र में (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| कार्यक्रम | विधानसभा घेराव (बजट सत्र के दौरान) |
| अवधि | 9 मार्च से 13 मार्च 2026 |
| मुख्य नेतृत्व | आशीष नेगी (युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष, उक्रांद) |
| सहभागी जिले | उत्तरकाशी से पिथौरागढ़ और ऊधम सिंह नगर से टिहरी तक |
| प्रमुख मांग | गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाना, मूल निवास, भू-कानून |

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