आम आदमी के घर के सपने पर जीएसटी की मार, ईंट पर जीएसटी दोगुना से ज्यादा हुआ

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मकान बनाने का सपना देख रहे आम आदमी और निर्माण क्षेत्र को महंगाई का एक और झटका लगा है। सरिये, सीमेंट और सेनेटरी सामान की महंगाई केे बाद अब ईंटों की बारी है। केंद्र सरकार ने ईंटों पर लगने वाले जीएसटी को दोगुना से ज्यादा कर दिया है। पहले सभी तरह की ईंटों पर 5 प्रतिशत जीएसटी लग रहा था। एक अप्रैल से अब ईंटों पर जीएसटी की दर 12 प्रतिशत होगी। इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) का लाभ छोड़ने की शर्त पर जीएसटी आधा हो सकेगा लेकिन इससे आम उपभोक्ता को कोई राहत नहीं मिलेगी।

केंद्र सरकार ने 31 मार्च को राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित कर ईंटों पर टैक्स बढ़ाने का आदेश लागू कर दिया। निर्माण क्षेत्र और घर निर्माण का सपना देख रहे आम लोगों पर टैक्स की मार भारी पड़ती दिख रही है। बीते समय में सरकार सरिये पर भी जीएसटी को 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर चुकी है। सीमेंट पर भी जीएसटी की दर 28 प्रतिशत की जा चुकी है। इसी के साथ विट्रीफाइड टाइल्स, सेनेटरी वस्तुओं पर भी सरकार टैक्स बढ़ाकर 18 प्रतिशत जीएसटी वसूल रही है। सरिये के दाम भी रिकार्ड ऊंचाई तक पहुंच चुके हैं। सीमेंट की कीमतें भी लगातार बढ़ रही है। टाइल्स के दामों में भी 40 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है।

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कमर्शियल टैक्स प्रेक्टिशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष केदार हेड़ा के अनुसार सभी वस्तुओं के दाम बढ़े तो यदि जीएसटी की दर नहीं बढ़ती तो भी कीमत के अनुपात में खरीदारों को ज्यादा टैक्स देना पड़ता। अब सरकार ने जीएसटी दरें बढ़ा दी है ऐसे में निर्माण मटैरियल खरीदने वालों पर टैक्स का बोझ कई गुना बढ़ गया है।

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छूट की शर्त से उपभोक्ताओं का लाभ नहीं

कमर्शियल टैक्स प्रेक्टिशनर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट एके गौर के अनुसार सभी तरह की ईंटे चाहे फ्लाइ ऐश की हो या मिट्टी की सभी पर 12 प्रतिशत जीएसटी देय होगा। अगर कोई व्यापारी अपना इनपुट टैक्स क्रेडिट छोड़ता है तो उसके लिए जीएसटी आधा होकर छह प्रतिशत हो जाएगा। इस शर्त का लाभ चुनिंदा जीएसटी रजिस्टर्ड डीलर्स यानी बड़े बिल्डर आदि ले सकेंगे। आम उपभोक्ता से तो विक्रेता 12 प्रतिशत टैक्स ही वसूलेगा। सीधे तौर पर सरकार महंगाई बढ़ाकर अपना टैक्स कलेक्शन बढ़ाती दिख रही है।