जल महल का इतिहास : जयपुर

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जयपुर की गुलाबी शहर का जल महल एक ऐतिहासिक धरोहर है और यह शहर के बीचोबीच स्थित है 15वीं शताब्दी में अकाल पड़ने पर आमेर के राजा राजा मानसिंह द्वितीय ने यहां बांध बनाने का निश्चय किया और पानी की निकासी के लिए एक  महल भी बनवाया यह महल इस झील के बीच में स्थित है इसका उद्देश्य बारिश का पानी पहाड़ों से होता है इसके अंदर इकट्ठा हो जाए कहा जाता है यह महल 300 साल पहले बना था और आज भी वैसा का वैसा ही खड़ा है इस एक पर्यटन स्थल के रूप में संभाल के रखा गया है सरकार के द्वारा इसकी देखभाल की जाती है इसकी साफ-सफाई और जेल की साफ सफाई आदि सरकार के द्वारा की जाती है कहा जाता है राजा अपने राज्यश्री कार्यों के लिए इसका इस्तेमाल करता था राजा अश्वमेघ यज्ञ करने के बाद स्नान के लिए और अपने मनोरंजन के लिए यहां आता था कहा जाता है यह महल 5 मंजिला है बाहर से देखने पर यह 1 मंजिला दिखाई देता है बाकी की 4 मंजिल पानी के अंदर है सुरक्षा की दृष्टि से अभी इसकी चार मंजिलों में आना जाना बंद कर रखा है क्योंकि वह पानी के अंदर है पानी के बीचो बीच यह एक मनमोहक रूप से दिखाई देता है यहां अनेक पर्यटक आते हैं क्योंकि से पर्यटन स्थल के रूप में भी घोषित कर रखा है इसके आसपास आज भी अनेक लोग कार्यक्रम होते हैं जो मनोरंजन करते हैं पर्यटक होगा यह एक विश्व धरोहर में शामिल है कहानियों में चुना जाता है किसकी 4 मंजिलें सोने से भरी है और अनेक कहानियां इसकी प्रसिद्ध है कहा जाता है किसकी चार मंजिलों में भूतों का वास है कहा जाता है राजा तंत्र-मंत्र के साधन यहीं पर स्थापित करता था अगर आप छुट्टी बनाने का प्लान बना रहे हो तो यहां जाए यहां नवंबर दिसंबर का समय सबसे अनुकूल है दूर से देखने पर यह पानी पर तैरता हुआ नजर आता है इसलिए और आकर्षक लगता है इसके चारों तरफ पानी की झील है

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