
बताते चले कि रेलवे यात्रियों को अधिक सुविधाजनक यात्रा अनुभव देने के लिए देश में 54 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें चला रहा है। इसी क्रम में दो साल पहले काठगोदाम से भी वंदे भारत ट्रेन चलाने की तैयारी थी, लेकिन गौला नदी के उफान पर आने से शंटिंग लाइन बह गई थी, जिससे वंदे भारत ट्रेन का सपना टूट गया। दो साल बाद रेलवे ने शंटिंग लाइन की मरम्मत तो करा दी, लेकिन गौला नदी के खतरे को टालना आज भी बड़ी चुनौती है।
रेलवे अधिकारियों ने वंदे भारत के संचालन से पहले यहां का भौतिक सत्यापन किया, जिसमें पाया कि रेलवे का विस्तार संभव नहीं है, क्योंकि एक ओर आबादी बस चुकी है और दूसरी ओर गौला नदी कटाव कर रही है। काठगोदाम में ट्रेनों को खड़ा करने के लिए यार्ड भी सीमित हैं। दो प्लेटफार्म हैं। ट्रेनों को पास देने में दिक्कतें होती हैं।
इसलिए अब रेलवे वंदे भारत ट्रेन का संचालन लालकुआं से करने पर विचार कर रहा है। लालकुआं में ट्रेनों के लिए पर्याप्त जगह है और पांच प्लेटफार्म भी बने हैं। इसलिए लालकुआं से नई ट्रेनों के संचालन में किसी तरह की बाधा नहीं होगी। रेलवे का मानना है कि हल्द्वानी व कुमाऊं के लोग लालकुआं से वंदे भारत में सफर कर सकते हैं, क्योंकि स्टेशन की दूरी हल्द्वानी से 20 से 25 किमी ही है।
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