गौला नदी के उफान और कटाव से प्रभावित क्षेत्रों का नंदन दुर्गापाल ने किया निरीक्षण; कहा- “अस्थाई पैचवर्क नहीं, बिंदुखत्ता को चाहिए स्थाई समाधान”

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लालकुआं। गौला नदी में आए भारी उफान और उसके कारण तेजी से हो रहे भू-कटाव से बिंदुखत्ता और तटीय क्षेत्रों में पैदा हुए गंभीर संकट का जायजा लेने पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल के पुत्र और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता नंदन दुर्गापाल प्रभावित इलाकों में पहुंचे। उन्होंने धरातल पर जाकर नदी से हो रहे भूमि कटाव और आवासीय बस्तियों पर मंडरा रहे खतरे का बारीकी से निरीक्षण किया।
दौरे के दौरान ग्रामीणों की जान-माल पर बने खतरे को देखते हुए नंदन दुर्गापाल ने मौके से ही जिलाधिकारी (डीएम) नैनीताल से फोन पर वार्ता की। उन्होंने डीएम को जमीनी हालात से अवगत कराते हुए मांग की कि गौला किनारे खतरे की जद में रह रहे परिवारों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर रेस्क्यू किया जाए और उनके रहने व भोजन की तात्कालिक व्यवस्था प्रशासन द्वारा सुनिश्चित की जाए।
इस दौरान नंदन दुर्गापाल ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा, “हर साल मॉनसून में बाढ़ आएगी और तबाही मचाएगी, प्रशासन अस्थाई इंतजाम कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है। लेकिन सवाल यह है कि बिंदुखत्ता को गौला नदी के इस स्थाई खतरे से बचाने का परमानेंट (स्थायी) समाधान कब होगा?” उन्होंने मांग की कि प्रभावित परिवारों के सुरक्षित पुनर्वास और क्षेत्र में आरसीसी (RCC) पक्के तटबंधों के निर्माण के लिए सरकार को तुरंत ठोस नीति बनाकर काम शुरू करना चाहिए।
निरीक्षण के दौरान उनके साथ भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे, जिन्होंने प्रशासन से अविलंब राहत कार्य शुरू करने की गुहार लगाई।
वहीं, नंदन दुर्गापाल के साथ प्रभावितों की सुध लेने पहुंचे वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मोहन कुड़ाई ने सरकार और आपदा प्रबंधन तंत्र की लापरवाही पर तीखा प्रहार किया। मोहन कुड़ाई ने कहा कि शासन-प्रशासन हर साल बाढ़ आने के बाद केवल औपचारिकता निभाता है। नदी किनारे लाखों रुपये खर्च कर जो अस्थाई क्रैट या कट्टे लगाए जाते हैं, वे पानी के एक ही बहाव में बह जाते हैं। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, “अब बिंदुखत्ता की जनता इन अस्थाई पैचवर्क और झूठे आश्वासनों से बहलने वाली नहीं है। सरकार को जागना होगा और यहां आपदा रोधी आरसीसी (RCC) पक्के तटबंधों का निर्माण तुरंत शुरू करना होगा। अगर जल्द ही प्रभावितों को सुरक्षित विस्थापित नहीं किया गया और स्थाई सुरक्षा कार्य शुरू नहीं हुए, तो कांग्रेस जनता के साथ मिलकर उग्र आंदोलन को बाध्य होगी।”

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