एक कप चाय की प्याली ने बदली आरोपों की दिशा — मंच पर बदले की आग, डाइनिंग टेबल पर ‘बड़े भाई’

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राजू अनेजा, गदरपुर।तराई की राजनीति में बुधवार को जो हुआ, उसने यह साफ कर दिया कि यहां आरोप माइक देखकर गरजते हैं और सियासी रिश्ते चाय की प्याली में घुल जाते हैं। गदरपुर में जमीन कब्जे के गंभीर आरोपों की प्रेसवार्ता कुछ ही मिनटों में ऐसे दृश्य में बदली, जिसने राजनीति की असल तस्वीर सामने रख दी।
युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुमित्तर भुल्लर ने अपने आवास पर आयोजित प्रेसवार्ता में गदरपुर विधायक अरविंद पांडेय और उनके पुत्र पर बुक्सा जनजाति की जमीनों को हड़पने के प्रयास का आरोप लगाया। मंच से सत्ता के दुरुपयोग, प्रशासन की चुप्पी और आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों पर हमले की बात कही गई। चेतावनी दी गई कि न्याय नहीं मिला तो आंदोलन होगा और सड़क से सदन तक लड़ाई लड़ी जाएगी।
लेकिन प्रेसवार्ता की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि सियासत की पटकथा पलट गई। आरोपों के घेरे में खड़े विधायक अरविंद पांडेय अचानक उसी आवास पर पहुंच गए। जिन पर कुछ देर पहले गंभीर आरोप लगाए गए थे, वही नेता अगले ही पल ‘बड़े भाई’ बनकर डाइनिंग टेबल तक पहुंच गए।
मंच पर बदले और संघर्ष की आग थी, तो डाइनिंग टेबल पर आत्मीयता और चाय की गर्माहट। कैमरे सवालों के लिए तैयार थे, लेकिन जवाबों से पहले गलबहियां हो गईं। कांग्रेस कार्यकर्ता हैरान रहे और जनता सोच में पड़ गई कि क्या आदिवासी जमीनों का मुद्दा भी इसी चाय के साथ निपटा दिया गया?
भुल्लर ने कहा कि संघर्ष जारी रहेगा, जबकि विधायक पांडेय ने इसे पारिवारिक आत्मीयता बताया। मगर राजनीतिक तंज यही है कि जिन आरोपों को संविधान से जोड़कर पेश किया गया, वे अचानक व्यक्तिगत रिश्तों के नीचे दबते नजर आए।
गदरपुर की राजनीति ने एक बार फिर बता दिया कि यहां मंच पर तलवारें निकलती हैं और ड्राइंग रूम में म्यान में चली जाती हैं। अब देखना यह है कि यह मामला आंदोलन की शक्ल लेता है या फिर एक चाय के साथ सियासी बर्फ पूरी तरह पिघल जाती है।

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