सरकारी स्कूल में बना ‘भूत का मंदिर’; छात्रों से वसूली और वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों से मचा हड़कंप

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बागेश्वर जिले के कौसानी स्थित राजकीय इंटर कॉलेज (GIC) से एक बेहद अजीबोगरीब और गंभीर मामला सामने आया है। स्कूल परिसर में ‘भूत का मंदिर’ बनाने और छात्रों से अवैध वसूली के आरोपों ने शिक्षा विभाग में खलबली मचा दी है। मुख्य शिक्षाधिकारी (CEO) ने इस पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दे दिए हैं।

यहाँ इस विवादित मामले का विस्तृत विवरण दिया गया है:

बागेश्वर/कौसानी (4 अप्रैल 2026): राजकीय इंटर कॉलेज कौसानी इन दिनों पढ़ाई नहीं, बल्कि परिसर में बने एक मंदिर और पैसों के कथित हेरफेर को लेकर चर्चा में है। अभिभावकों के कड़े विरोध के बाद विभाग ने खंड शिक्षाधिकारी (BEU) गरुड़ को जांच सौंपी है।

1. क्यों बना ‘भूत का मंदिर’?

  • मान्यता: बताया जा रहा है कि विद्यालय परिसर के जिस स्थान पर मंदिर बनाया गया है, वहां पूर्व में किसी व्यक्ति की असमय मृत्यु हुई थी। अंधविश्वास या स्थानीय मान्यताओं के चलते विद्यालय प्रशासन ने वहां लगभग 25 हजार रुपये की लागत से ‘भूत मंदिर’ का निर्माण करवा दिया।

  • अवैध वसूली: आरोप है कि इस निर्माण के लिए स्कूल के 218 छात्रों से प्रति छात्र 100 रुपये वसूले गए। शिक्षकों के योगदान को मिलाकर कुल ₹25,000 एकत्र हुए, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता और आकार पर सवाल उठ रहे हैं।

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2. ‘सफाई शुल्क’ पर भी विवाद

अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधन पर नियमों की धज्जियां उड़ाने का आरोप लगाया है:

  • नियम विरुद्ध वसूली: कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों से किसी भी प्रकार का शुल्क लेना प्रतिबंधित है, फिर भी दिसंबर 2025 से प्रति माह 50 रुपये सफाई शुल्क लिया जा रहा है।

  • समय का हेरफेर: हैरानी की बात यह है कि स्कूल में सफाई कर्मचारी की नियुक्ति फरवरी 2026 में हुई, जबकि वसूली दिसंबर 2025 से ही शुरू कर दी गई थी।

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3. अन्य वित्तीय अनियमितताएं

विद्यालय पर केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि अन्य सरकारी धन के गबन के भी आरोप हैं:

  • कोविड फंड: ऑनलाइन प्रशिक्षण के लिए विभाग से आए 11 हजार रुपये संबंधित शिक्षकों को नहीं दिए गए।

  • बोर्ड परीक्षा मानदेय: सत्र 2024-25 की बोर्ड परीक्षाओं में ड्यूटी करने वाले शिक्षकों का मानदेय डकारने का भी आरोप लगा है।

4. जिम्मेदारी और सफाई

  • प्रधानाचार्य का पक्ष: प्रधानाचार्य ताजबर सिंह ने दावों को खारिज करते हुए कहा कि मंदिर और सफाई के लिए धन पीटीए (PTA) बैठक में अभिभावकों की सहमति से लिया गया था। उन्होंने पुराने मामलों को अपने कार्यकाल से पहले का बताया है।

  • विभाग की कार्रवाई: मुख्य शिक्षाधिकारी विनय कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा, “समाचार संज्ञान में आते ही खंड शिक्षाधिकारी गरुड़ को जांच सौंप दी गई है। सरकारी संस्थान में अंधविश्वास को बढ़ावा देना और अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

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