अल्मोड़ा: ‘जात्रा द कसार फेस्टिवल’ में लोक संस्कृति और साहसिक खेलों का अनूठा संगम; पैराग्लाइडिंग के रोमांच ने पर्यटकों को किया मंत्रमुग्ध

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अल्मोड़ा, 29 जून 2026: सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा के प्रसिद्ध कसार देवी क्षेत्र के अंतर्गत डीनापानी में आयोजित ‘जात्रा द कसार फेस्टिवल 2026’ इन दिनों देश-विदेश से आए पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस भव्य महोत्सव में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत तथा आधुनिक साहसिक खेल गतिविधियों का एक बेहद अनूठा और मनमोहक संगम देखने को मिल रहा है। रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और आसमान में उड़ते पैराग्लाइडरों ने पूरे आयोजन को अप्रत्याशित उत्साह और उल्लास से सराबोर कर दिया है।

गड़ोली के आसमान में दिखा पैराग्लाइडिंग का रोमांच; युवाओं में भारी क्रेज

महोत्सव के अंतर्गत डीनापानी के मुख्य मैदान में जहां एक ओर सांस्कृतिक मंच सजा हुआ है, वहीं निकटवर्ती गड़ोली गांव में आयोजित पैराग्लाइडिंग (Paragliding) का विशेष डेमोंस्ट्रेशन लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। क्षेत्र में साहसिक पर्यटन (Adventure Tourism) को एक नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से इस गतिविधि का विशेष संचालन किया जा रहा है।

  • कौशल का प्रदर्शन: पैराग्लाइडिंग डेमोंस्ट्रेशन के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञ पायलटों और प्रतिभागियों ने सुरक्षित व सफल उड़ान भरकर अपने हवाई कौशल का शानदार प्रदर्शन किया।

  • दर्शकों का उत्साह: नीले आसमान में तैरते रंग-बिरंगे पैराग्लाइडरों के मनमोहक दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक गड़ोली गांव पहुंचे। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ हवा में करतब दिखा रहे प्रतिभागियों का जोरदार उत्साहवर्धन किया।

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कुमाऊं की लोक परंपराओं की दिखी झलक; झोड़ा-चांचरी पर थिरके लोग

फेस्टिवल की सांस्कृतिक संध्या पूरी तरह से कुमाऊं मंडल की समृद्ध लोक विरासत के नाम रही। प्रदेश के प्रतिष्ठित लोक कलाकारों ने मंच पर कदम रखते ही दर्शकों को अपनी पारंपरिक कला के रंग में सराबोर कर दिया।

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सांस्कृतिक संध्या के दौरान कुमाऊं की पारंपरिक विधाओं जैसे झोड़ा, चांचरी और देव-आह्वान के पवित्र जागरों की सामूहिक व मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। लोकगीतों की इन पारंपरिक कर्णप्रिय धुनों पर केवल कलाकार ही नहीं, बल्कि पंडाल में मौजूद स्थानीय लोग और विदेशी पर्यटक भी स्वयं को थिरकने से नहीं रोक पाए। इसके साथ ही, स्थानीय स्कूली बच्चों और बाल कलाकारों ने भी अपनी अनूठी प्रतिभा का प्रदर्शन कर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी।

विरासत का संरक्षण और पर्यटन को नई दिशा देना ही मुख्य उद्देश्य: आयोजन समिति

इस सफल आयोजन के प्रशासनिक व व्यावहारिक उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए आयोजन समिति की सदस्य विभू कृष्णा ने बताया:

“जात्रा द कसार फेस्टिवल का मुख्य उद्देश्य देवभूमि उत्तराखंड की लुप्त होती समृद्ध लोक संस्कृति को संरक्षित, संवर्धित और प्रोत्साहित करना है। इसके साथ ही कसार देवी और आसपास के क्षेत्रों को वैश्विक मानचित्र पर साहसिक पर्यटन के एक बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करना भी हमारी प्राथमिकता है। इस प्रकार के आयोजन न केवल दूरस्थ क्षेत्रों के स्थानीय कलाकारों को एक बड़ा राष्ट्रीय मंच प्रदान करते हैं, बल्कि स्थानीय होमस्टे और रोजगारपरक पर्यटन गतिविधियों को भी एक नई दिशा देते हैं। भविष्य में भी सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए ऐसे महोत्सव निरंतर आयोजित किए जाएंगे।”

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