राजनीतिक वनवास के बाद अब कांग्रेस की दहलीज पर ठुकराल, मुकदमों की बौछार—सुरक्षा हटी, सत्ता वापसी के लिए कांग्रेस की भी मजबूरी

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मां की बिगड़ती तबीयत के बीच मीना शर्मा से सार्वजनिक माफी, गनर भी गया—2027 से पहले सियासी भूचाल
राजू अनेजा, रुद्रपुर।राजनीतिक वनवास झेल रहे रुद्रपुर के पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कांग्रेस का दामन थामने से पहले ही ठुकराल पर दर्ज मुकदमे, गनर की वापसी और प्रशासनिक सक्रियता अब राजनीतिक गलियारों में तीखी चर्चा का विषय बन चुकी है।
मुकदमा दर्ज होते ही ठुकराल ने मीना शर्मा से सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली। उन्होंने माफी के पीछे अपनी मां की बिगड़ती तबीयत का हवाला देते हुए कहा कि मुकदमे की जानकारी मिलते ही उनकी मां का बीपी 400 के पार पहुंच गया, जिसके बाद उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। ठुकराल भावुक होते हुए बोले—
“मैं अपनी मां को तिल-तिल मरते नहीं देख सकता।”

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‘षड्यंत्र हो रहा है, सबको बेनकाब करूंगा’

राजकुमार ठुकराल का कहना है कि उनके खिलाफ सुनियोजित षड्यंत्र रचा जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि मीना शर्मा द्वारा लगाए जा रहे गो-हत्या जैसे गंभीर आरोपों की सीबीआई जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

एसडीएम की कोतवाली मौजूदगी पर उठे सवाल

इस पूरे प्रकरण में एसडीएम का स्वयं कोतवाली पहुंचना भी कई सवाल खड़े कर रहा है। विपक्षी खेमे में इसे सामान्य कानूनी प्रक्रिया से अलग, “राजनीतिक दबाव की कार्रवाई” के रूप में देखा जा रहा है।

गनर गया, अब ‘अकेले चलने’ का ऐलान

मुकदमा दर्ज होने के बाद ठुकराल का सरकारी गनर भी हटा लिया गया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ठुकराल ने कहा—
“अब मैं अकेले चलूंगा। जरूरत पड़ी तो अपना असलहा भी जमा करा दूंगा।”
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आएंगे, उन पर और मुकदमे दर्ज किए जा सकते हैं।

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2027 की लड़ाई और कांग्रेस की सियासी मजबूरी

राजनीतिक जानकारों की मानें तो 2027 के विधानसभा चुनावों में रुद्रपुर सीट पर भाजपा को सीधी टक्कर देने के लिए कांग्रेस के पास फिलहाल राजकुमार ठुकराल से अधिक प्रभावी चेहरा नहीं है। कांग्रेस की खोई हुई प्रतिष्ठा को रुद्रपुर में वापस दिलाने की क्षमता यदि किसी में है, तो वह ठुकराल ही माने जा रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में किच्छा के विधायक तिलक राज बेहड़ का उदाहरण भी दिया जा रहा है, जिन्होंने भाजपा से टिकट न मिलने पर कांग्रेस का दामन थामा और बाद में भारी मतों से विजय हासिल की थी।
निष्कर्ष साफ
एक ओर मां की बीमारी, दूसरी ओर मुकदमे, गनर की वापसी और प्रशासनिक कार्रवाई—
राजकुमार ठुकराल की राह आसान नहीं है।
लेकिन यह भी उतना ही सच है कि 2027 की राजनीति में ठुकराल को नजरअंदाज करना किसी भी दल के लिए आसान नहीं होगा।