हल्दूचौड़ में स्वास्थ्य सेवा में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण मोड़: पीयूष जोशी की शिकायत के पश्चात विभागीय कार्रवाई में सुधार की नई लहर

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लालकुआं।
पिछली कई महीनों से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हल्दूचौड़ में मरीजों को उचित चिकित्सा सेवा न मिल पाने, चिकित्सकीय स्टाफ की अनुपस्थिति, उपकरणों में खराबी और सुरक्षा व्यवस्था में कमी की गंभीर समस्याएँ बनी हुई थीं। इन मुद्दों को लेकर प्रदेश अध्यक्ष आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन पीयूष जोशी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायती पत्र में उन्होंने आरोप लगाया था कि मानव अधिकार आयोग को दी गई जानकारी के विपरीत, अस्पताल में केवल एक नर्स ही मौजूद थी, जबकि बताया गया था कि 5 चिकित्साधिकारी, 6 नर्सिंग स्टाफ, 1 एलटी, 1 नेत्र तकनीशियन एवं 1 हाईजेनिस्ट तैनात हैं। साथ ही, डॉक्टरों की अनियमित उपस्थिति और आपातकालीन सेवाओं में व्यवधान ने मरीजों के मौलिक अधिकारों का हनन किया।

शिकायत प्राप्त होते ही स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए बीते दिनों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि वर्तमान में कुल 5 चिकित्साधिकारी एवं 6 नर्सिंग अधिकारी (5 नियमित एवं 1 संविदा) तैनात हैं, और उस दिन 95 मरीजों का पंजीकरण भी हुआ। निरीक्षणकर्ताओं ने चिकित्सकीय ड्यूटी रोस्टर को नोटिस बोर्ड पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने का आदेश जारी किया ताकि मरीजों को अस्पताल में तैनात डॉक्टरों की सही जानकारी मिल सके। इस निर्देश से पहले अस्पताल में ड्यूटी सूची अस्पष्ट होने के कारण भ्रम की स्थिति पैदा हो रही थी।
उपकरणों एवं सेवाओं के क्षेत्र में भी सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। शिकायत में यह भी बताया गया था कि अल्ट्रासाउण्ड मशीन में तकनीकी खराबी और विद्युत लाइन में फॉल्ट के कारण इसका पूर्ण उपयोग नहीं हो पा रहा था। विभाग ने इस समस्या के समाधान हेतु रेडियोलॉजिस्ट की स्थायी नियुक्ति करने का निर्देश दिया तथा अल्ट्रासाउण्ड सेवाओं में वृद्धि की मांग की गई। इसके अलावा, एक्स-रे मशीन की कमी को देखते हुए जिला क्षयरोग अधिकारी नैनीताल को आदेश जारी किया गया कि जल्द से जल्द आवश्यक एक्स-रे मशीन की व्यवस्था की जाए ताकि रोगियों के चेस्ट परीक्षण में होने वाली देरी को रोका जा सके।

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सुरक्षा व्यवस्था में भी सुधार के लिए अस्पताल में 24×7 सुरक्षा गार्ड की तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए। साथ ही, पिछले छह महीनों से अनुपस्थित रहे चिकित्सा स्टाफ के खिलाफ उत्तराखण्ड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 2003 एवं अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी पहल की गई।

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इस कदम से अस्पताल प्रबंधन में जवाबदेही बढ़ाने और भविष्य में ऐसी लापरवाही से बचाव सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत मिले।
शिकायत के बाद विभागीय निरीक्षण एवं सुधारात्मक निर्देशों के परिणाम स्वरूप अब पहले की तुलना में सुधार की आशा जगाई जा रही है।

अस्पताल में चिकित्सकीय स्टाफ की उपस्थिति में सुधार के साथ-साथ उपकरणों की उपलब्धता और सुरक्षा व्यवस्था में भी परिवर्तन देखा गया है। निरीक्षणकर्ता ने बताया कि संविदा नर्सिंग की स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया शीघ्र ही पूर्ण होने वाली है तथा सहायक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।

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विभाग ने यह भी निर्देश दिया कि रेडियोलॉजी सेवाओं को बढ़ाने हेतु मॉडर्न उपकरणों की व्यवस्था में तेजी लाने के साथ-साथ मरीजों की सुविधा के लिए सभी आवश्यक जानकारी ड्यूटी रोस्टर पर उपलब्ध कराई जाए।

शिकायतकर्ता पीयूष जोशी ने कहा है, “जब तक इस प्रकार की फालतू और असंगत स्वास्थ्य सुविधाएँ नहीं सुधरतीं, मेरा संघर्ष जारी रहेगा व जल्द ही राज्यपाल, मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात करने का संकल्प रखता हूँ, ताकि स्वास्थ्य विभाग में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।” उन्होंने आगे यह भी जोड़ा कि यदि निर्धारित समयावधि (7 दिनों) के भीतर आवश्यक सुधार नहीं होते, तो उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दाखिल करने से पीछे नहीं हटूंगा।

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