दहेज उत्पीड़न मामले में फौजी पति निर्दोष करार: 11 साल साथ रहने पर कोर्ट ने उठाए सवाल
नैनीताल/बागेश्वर: जिला सत्र न्यायाधीश श्रीकांत पांडेय ने एक महिला की अपील पर सुनवाई करते हुए उसके फौजी पति को दहेज उत्पीड़न और मारपीट के आरोपों से निर्दोष करार दिया है। न्यायाधीश ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा। कोर्ट ने जिरह के दौरान पीड़िता के 11 साल तक पति के साथ रहने और पहले कोई शिकायत दर्ज न कराने पर सवाल उठाए।
📜 मामले का विवरण
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पीड़िता: अल्मोड़ा निवासी एक महिला।
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आरोपी: पति एम.एस. परिहार, निवासी कुलाउ, गरुड़, बागेश्वर (आर्मी जवान)।
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शिकायत: महिला ने जनवरी 2023 में न्यायालय में प्रार्थनापत्र देकर पति पर आरोप लगाए थे।
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पुलिस कार्रवाई: कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने पति के खिलाफ धारा 323, 498 ए, 504, 506 (मारपीट, दहेज उत्पीड़न, जान से मारने की धमकी, शांति भंग करने के इरादे से अपमान) के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
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विवाह की तिथि: जून 2011।
🏛️ कोर्ट में उठाए गए मुख्य प्रश्न
महिला ने आरोप लगाया था कि उसका पति शादी के बाद से ही उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करता था और आए दिन मारता-पीटता था। इस पर कोर्ट में जिरह के दौरान अभियुक्त के अधिवक्ताओं (भगवती प्रसाद पंत और महेश चंद्र सिंह परिहार) ने मुख्य रूप से ये सवाल उठाए:
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11 साल तक साथ क्यों रहे?
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अगर पति शादी के बाद से ही प्रताड़ित कर रहा था, तो महिला 11 साल तक उसके साथ कैसे रही?
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शादी के बाद पति उसे हिसार (हरियाणा) ले गया, फिर दिल्ली में साथ रखा, और हल्द्वानी में किराए का कमरा लेकर मकान भी बनवाया। उनके दो बच्चे भी हुए।
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शिकायत क्यों नहीं दर्ज कराई?
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महिला ने पति के खिलाफ इस लंबी अवधि (11 साल) के दौरान कोई शिकायत क्यों नहीं दर्ज कराई?
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कोर्ट ने इन तर्कों को ध्यान में रखते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा और फौजी पति को निर्दोष करार दिया।
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