देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने आज राजधानी के गांधी पार्क में एक दिवसीय उपवास और धरना शुरू किया है। उनकी मुख्य मांग लालकुआं क्षेत्र के बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम (Revenue Village) का दर्जा दिलाना और वहां रह रहे हजारों लोगों को भूमि का मालिकाना हक सुनिश्चित करना है।
भारी भीड़ और बिंदुखत्ता से आए समर्थक
धरने की खास बात यह रही कि हरीश रावत को समर्थन देने के लिए बिंदुखत्ता क्षेत्र से बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं बसों के जरिए देहरादून पहुंचे हैं।
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प्रमुख उपस्थिति: धरने में पूर्व कैबिनेट मंत्री हेमवती नंदन दुर्गापाल सहित कांग्रेस के कई दिग्गज नेता और सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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बढ़ता दबाव: रावत का यह धरना ऐसे समय में हो रहा है जब आज, 25 फरवरी को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल (Cabinet) की बैठक चल रही है।
भाजपा पर लगाया गुमराह करने का आरोप
गांधी पार्क में समर्थकों को संबोधित करते हुए हरीश रावत ने कहा:
“बिंदुखत्ता के लोग दशकों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। भाजपा सरकार ने राजस्व गांव के नाम पर केवल वोट मांगे हैं और लोगों को बार-बार झूठे आश्वासन देकर गुमराह किया है। अब समय आ गया है कि सरकार इस पर ठोस और विधिसम्मत निर्णय ले।”
कैबिनेट बैठक और राजस्व ग्राम का प्रस्ताव
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आज की कैबिनेट बैठक में बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव टेबल हो सकता है। हरीश रावत ने साफ किया कि उनका यह उपवास सरकार को उस वादे की याद दिलाने के लिए है, जो चुनाव के समय किया गया था।
बिंदुखत्ता विवाद: एक नज़र में (Quick Facts)
| विवरण | जानकारी |
| स्थान | गांधी पार्क, देहरादून (प्रदर्शन स्थल) |
| मुख्य मांग | बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा और मालिकाना हक |
| आयोजनकर्ता | पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत |
| राजनीतिक संदर्भ | 25 फरवरी की कैबिनेट बैठक के साथ ही विरोध |
| प्रमुख सहयोगी | हेमवती नंदन दुर्गापाल एवं बिंदुखत्ता के ग्रामीण |
बिंदुखत्ता के लिए राजस्व ग्राम का दर्जा क्यों है जरूरी?
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मालिकाना हक: वर्तमान में यह वन भूमि और राजस्व भूमि के फेर में फंसा है, जिससे लोगों को अपनी जमीन के पक्के दस्तावेज नहीं मिल पाते।
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सरकारी सुविधाएं: राजस्व ग्राम बनने के बाद क्षेत्र में बैंक लोन, पक्के निर्माण की अनुमति और नगर निकाय की सुविधाएं मिलना आसान हो जाएगा।
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स्थायी समाधान: दशकों से बसे हजारों परिवारों के सिर पर हमेशा विस्थापन की तलवार लटकी रहती है।
अगला कदम: अब सभी की निगाहें धामी कैबिनेट के फैसलों पर टिकी हैं। क्या सरकार इस धरने के दबाव में आज कोई बड़ी घोषणा करेगी?

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