बिन्दुखत्ता की हुंकार: “अब प्रतीक्षा नहीं, समाधान चाहिए”; महारैली में उमड़ा जनशक्ति का सैलाब, दिग्गजों ने भरी हुंकार
लालकुआं/बिन्दुखत्ता | 18 फरवरी, 2026: बिन्दुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की मांग अब एक निर्णायक जन-आंदोलन में बदल चुकी है। आज बिन्दुखत्ता की धरती पर आयोजित महारैली में उमड़ी हजारों की भीड़ ने यह साफ कर दिया कि यह केवल एक मांग नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के स्वाभिमान और भविष्य की लड़ाई है। राजनीति और सामाजिक सरोकारों से जुड़े दिग्गजों ने एक सुर में सरकार को चेतावनी दी कि अब औपचारिकताओं का समय समाप्त हो चुका है।
🎙️ सियासी दिग्गजों की दहाड़: “सरकार धैर्य की परीक्षा न ले”
महारैली के मंच से प्रदेश के बड़े नेताओं ने सरकार पर तीखे प्रहार किए:
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हरीश रावत (पूर्व मुख्यमंत्री): “बिन्दुखत्ता की आवाज अब पूरे प्रदेश में गूंज रही है। सरकार को समझना चाहिए कि जनता के धैर्य की भी एक सीमा होती है। कांग्रेस इस संघर्ष में अंतिम सांस तक जनता के साथ खड़ी है।”
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यशपाल आर्य (नेता प्रतिपक्ष): “यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मौलिक अधिकारों का सवाल है। अगर जल्द निर्णय नहीं हुआ, तो यह आंदोलन हर घर तक पहुंचेगा।”
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हरेंद्र बोरा: “अब समय गंवाने का वक्त नहीं है, सरकार तुरंत अधिसूचना जारी करे। यह क्षेत्र के सम्मान का प्रश्न है।”
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हेमवती नन्दन दुर्गापाल: “सामाजिक न्याय केवल भाषणों में नहीं, ठोस निर्णयों में दिखना चाहिए। राजस्व गांव का दर्जा मिलने से ही भूमि और आवास की अनिश्चितता खत्म होगी।”
👩ओ महिला शक्ति और युवाओं का जोश
रैली की सबसे बड़ी विशेषता महिलाओं की भारी उपस्थिति रही। संध्या डालाकोटी ने कहा कि महिलाएं अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए अग्रिम पंक्ति में खड़ी हैं। वहीं, नितिन पंत और प्रमोद कॉलोनी ने स्पष्ट किया कि आंदोलन अब उस चरण में है जहां से पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं है।
🛡️ संघर्ष समिति का संकल्प: “एकजुटता ही जीत का आधार”
संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले एकजुट हुए पदाधिकारियों ने आंदोलन को गैर-राजनीतिक और जनहितैषी बताया:
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कुंदन सिंह मेहता (संयोजक): “क्षेत्रवासियों की यह एकजुटता ही हमारी असली पूंजी है। यह अनुशासित प्रदर्शन निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम लाएगा।”
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उमेश भट्ट व बलवंत सिंह बिष्ट: “यह किसी दल की नहीं, पूरे क्षेत्र की लड़ाई है। जब तक हक नहीं मिलता, संघर्ष थमेगा नहीं।”
📊 रैली के मुख्य बिंदु और संदेश
| मुख्य आकर्षण | विवरण |
| जनशक्ति | हजारों की संख्या में स्त्री, पुरुष, युवा और बुजुर्गों की भागीदारी। |
| मुख्य मांग | बिन्दुखत्ता को बिना किसी देरी के ‘राजस्व ग्राम’ घोषित करने की अधिसूचना। |
| माहौल | पूर्णतः अनुशासित, शांतिपूर्ण लेकिन संकल्प से भरा हुआ। |
| नतीजा | सरकार को स्पष्ट संकेत कि अब केवल वादों से काम नहीं चलेगा। |
निष्कर्ष: बिन्दुखत्ता की इस ऐतिहासिक रैली ने सत्ता के गलियारों तक सीधी गूंज पहुंचा दी है। एक ओर जहां सरकार 25 फरवरी की कैबिनेट में प्रस्ताव लाने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर इस जनसैलाब ने यह तय कर दिया है कि जनता अब ‘पूर्ण समाधान’ से कम पर मानने वाली नहीं है।

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