
राजू अनेजा,काशीपुर। शहर में इन दिनों गैस सिलेंडरों की किल्लत ने छोटे कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। चाट-पकौड़ी, चाय, मोमो, चाऊमीन, बर्गर और छोटे खानपान के ठेले लगाने वाले दुकानदार गैस सिलेंडर के लिए भटकने को मजबूर हैं। कई जगहों पर चूल्हे तक ठंडे पड़ने लगे हैं और रोज कमाकर परिवार का गुजारा करने वाले इन कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
कमर्शियल सिलेंडर बाजार से गायब
सूत्रों के अनुसार बाजार में कमर्शियल गैस सिलेंडर मिलना मुश्किल हो गया है। अधिकांश गैस एजेंसियों पर स्टॉक न होने की बात कही जा रही है, जिससे छोटे कारोबारी परेशान हैं। खानपान के ठेले और छोटी दुकानों का पूरा काम गैस सिलेंडर पर ही निर्भर रहता है, ऐसे में सिलेंडर की कमी ने उनके कामकाज को सीधे प्रभावित कर दिया है।
₹3000 में भी नहीं मिल रहा सिलेंडर
कारोबारियों का कहना है कि मजबूरी में वे खुले बाजार में महंगे दामों पर भी सिलेंडर लेने को तैयार हैं। चर्चा है कि कई लोग ₹3000 तक खर्च करने को तैयार हैं, इसके बावजूद गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इससे छोटे दुकानदारों की आर्थिक हालत और खराब होती जा रही है।
अंगीठी और कोयले का लेना पड़ रहा सहारा
गैस की किल्लत के चलते शहर के कई चाय के खुमचे और छोटे फास्ट-फूड ठेले फिर से पुराने तरीके अपनाने को मजबूर हो गए हैं। कई दुकानदार अंगीठी और कोयले से चाय-नाश्ता तैयार कर रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि इससे काम धीमा हो जाता है और धुएं के कारण काम करना भी काफी मुश्किल हो जाता है।
जनप्रतिनिधि और व्यापारिक संगठन खामोश
छोटे कारोबारियों का कहना है कि इतनी बड़ी समस्या के बावजूद अब तक न तो किसी जनप्रतिनिधि ने उनकी सुध ली है और न ही व्यापारिक संगठनों की ओर से कोई ठोस पहल देखने को मिली है। दुकानदारों का कहना है कि उनकी पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है।
प्रशासन से आपूर्ति सामान्य करने की मांग
छोटे कारोबारियों ने प्रशासन से मांग की है कि शहर में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति जल्द सामान्य कराई जाए और यदि कहीं कालाबाजारी हो रही है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो हजारों छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी पर गहरा संकट खड़ा हो सकता है।
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