सीएम आवास पर बिखरे लोक संस्कृति के रंग; कलाकारों के साथ झूमते नजर आए मुख्यमंत्री धामी

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देहरादून/काशीपुर (3 मार्च 2026): उत्तराखंड में होली का उल्लास अपने चरम पर है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सरकारी आवास और काशीपुर में आयोजित ‘रंगोत्सव’ में लोक संस्कृति और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए इसे सामाजिक एकता का महापर्व बताया।

1. सीएम आवास पर ब्रज और कुमाऊं का मिलन

मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम में विविध सांस्कृतिक रंग देखने को मिले:

  • रास और होली: ब्रज से आए रास कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। मुख्यमंत्री धामी पारंपरिक लोकधुनों पर होल्यारों के साथ हाथ में हाथ डालकर झूमते नजर आए।

  • सांस्कृतिक विरासत: मुख्यमंत्री ने कहा कि होली हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और समरसता का प्रतीक है। उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख और खुशहाली की कामना की।

2. काशीपुर का ‘रंगोत्सव’: “आओ दगड़ियो, नाचा गावा”

काशीपुर नगर निगम प्रांगण में आयोजित ‘रंगोत्सव’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।

  • होल्यारों की टोली: कुमाऊं से आई होल्यारों की टोली ने जब “आओ दगड़ियो, नाचा गावा, आ गई रंगीली होली” जैसे पारंपरिक गीत गाए, तो पूरा परिसर उत्सव के सागर में डूब गया।

  • आम जन का जुड़ाव: इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री का एक अलग रूप देखने को मिला। वह किसी प्रोटोकॉल की परवाह किए बिना लोक कलाकारों और गायकों के बीच बैठकर उनका उत्साहवर्धन करते रहे और उनके साथ कदम से कदम मिलाकर नृत्य किया।

मुख्यमंत्री का संदेश: प्रेम और भाईचारा

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा:

“होली का यह त्योहार हमारे आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव को सुदृढ़ करने का अवसर है। हमें अपनी जड़ों और अपनी लोक संस्कृति का सम्मान करते हुए मिलकर विकास के पथ पर आगे बढ़ना चाहिए।”


उत्सव के मुख्य आकर्षण (Key Highlights)

कार्यक्रम मुख्य आकर्षण
प्रतिभागी ब्रज के रास कलाकार और कुमाऊं के होल्यार
विशेषता मुख्यमंत्री का कलाकारों के साथ पारंपरिक नृत्य
प्रमुख धुन “आओ दगड़ियो, नाचा गावा” (कुमाऊँनी होली गीत)
उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और सामाजिक समरसता

निष्कर्ष: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा लोक कलाकारों का सम्मान और उनके साथ उत्सव में सक्रिय भागीदारी ने राज्य के कलाकारों में एक नया उत्साह भरा है। यह आयोजन प्रदेश की “अनेकता में एकता” और अपनी पारंपरिक लोक विधाओं के प्रति सम्मान को दर्शाता है।

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