सीएम योगी आदित्यनाथ की बहन शशि: पहाड़ पर चलाती हैं दुकान, भाई को राखी बांधने की पुरानी यादों से हुईं भावुक

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कोठार (उत्तराखंड)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (बचपन का नाम अजय सिंह बिष्ट) आज देश की राजनीति में एक बड़ा नाम हैं, लेकिन उनकी बहन शशि का जीवन आज भी सादगी और संघर्ष की मिसाल है। उत्तराखंड के कोठार गांव की रहने वाली शशि गांव से दूर पहाड़ पर स्थित पार्वती मंदिर के पास चाय-नाश्ते, प्रसाद और शिकंजी की दुकान चलाती हैं। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर अपने मुख्यमंत्री भाई को हाथों से राखी बांधने का जिक्र आते ही वह भावुक हो उठीं।
आखिरी बार कब बांधी राखी, बहन को भी याद नहीं
रक्षाबंधन के मौके पर जब शशि से भाई को राखी बांधने के बारे में पूछा गया तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने बताया कि वह हर साल अपने भाई के लिए डाक द्वारा राखी जरूर भेजती हैं, लेकिन उन्हें यह याद ही नहीं कि उन्होंने आखिरी बार अपने हाथों से महाराज जी को कब राखी बांधी थी। उन्होंने भावुक मन से कहा कि उन्हें नहीं पता कि वह अब अपनी कलाई पर भाई को राखी कब बांध पाएंगी, लेकिन बचपन की यादें और भाई के प्रति स्नेह आज भी उनके दिल में जीवंत है।
बहन की डोली उठाने से लेकर खील-बताशे की रस्म तक, योगी ने निभाई थी जिम्मेदारी
शशि ने अपने विवाह से जुड़ी पुरानी यादों को साझा करते हुए बताया कि 5 मार्च 1991 को हुई उनकी शादी में योगी आदित्यनाथ ने भाई के तौर पर सभी जिम्मेदारियां निभाई थीं। शादी के दौरान फेरों में खील-बताशे डालने की रस्म से लेकर खुद बहन की डोली उठाने तक का काम उन्होंने किया था। शशि ने यह भी याद किया कि जब योगी ऋषिकेश में पढ़ाई करते थे, तब सड़क न होने के बावजूद वे दिल्ली से पैदल ही गांव आया करते थे।
2010 में झोपड़ी से शुरू की थी दुकान, खुद लगाई टीन की छत
पहाड़ी क्षेत्रों में खेती से परिवार का खर्च चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण था और जंगली जानवर भी फसलों को नुकसान पहुंचाते थे। ऐसे में शशि ने वर्ष 2010 में एक छोटी सी झोपड़ी से चाय-नाश्ते और प्रसाद की दुकान शुरू की। कोरोना लॉकडाउन के दौरान उन्होंने खुद मेहनत करके दुकान पर टीन की छत लगाई। आज वे अपनी मेहनत से परिवार चलाती हैं और दुकान में उन्होंने अपने भाई योगी आदित्यनाथ की तस्वीर भी लगा रखी है।
फोन पर होती है बातचीत, भावुक हुए थे सीएम योगी
एक टीवी इंटरव्यू के दौरान जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उनकी बहन शशि की दुकान की तस्वीर दिखाई गई थी, तो वे भी अपने आंसू रोक नहीं पाए थे। जब शशि से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि महाराज जी को इतना भावुक नहीं होना चाहिए, क्योंकि मेहनत करके परिवार चलाना उनके जीवन का सामान्य हिस्सा है। योगी आदित्यनाथ के जीजा पूरन सिंह पायल ने बताया कि व्यस्तताओं के कारण मुलाकातें भले ही कम होती हों, लेकिन त्योहारों के दौरान फोन के माध्यम से भाई-बहन की बातचीत हो जाती है।
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