काशीपुर में फर्जी नक्शों और अवैध निर्माण पर घमासान, वीसीडीए को सौंपा शिकायती पत्र

फर्जी पंजीकरण, नियमों के उल्लंघन और अवैध कॉलोनियों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग
राजू अनेजा, काशीपुर।काशीपुर में फर्जी नक्शों और अवैध निर्माण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। उत्तराखंड शासन के पंजीकृत आर्किटेक्ट एवं इंजीनियर विशाल यादव ने काशीपुर विकास प्राधिकरण (वीसीडीए) के उपाध्यक्ष को शिकायती पत्र सौंपकर शहर में फर्जी नक्शों, अवैध निर्माण और नियमों की अनदेखी के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पत्र में कहा गया है कि शहर में कुछ स्थानों पर प्राधिकरण के नियमों की अनदेखी करते हुए निर्माण कार्य कराए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में फर्जी या अनियमित तरीके से तैयार किए गए नक्शों के आधार पर भवन निर्माण कराया जा रहा है, जिससे न केवल भवन निर्माण संबंधी नियमों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि शहर का सुनियोजित विकास भी प्रभावित हो सकता है।
फर्जी पंजीकरण और अनियमितताओं की जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने पत्र में मांग की है कि फर्जी पंजीकरण, संदिग्ध नक्शों और अवैध निर्माण से जुड़े मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी, आर्किटेक्ट, इंजीनियर या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अवैध कॉलोनियों पर भी उठाए सवाल
पत्र में शहर और आसपास विकसित हो रही अवैध कॉलोनियों का भी उल्लेख करते हुए कहा गया है कि बिना आवश्यक स्वीकृतियों के निर्माण गतिविधियां शहर की मूलभूत व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव डाल रही हैं। ऐसे मामलों की भी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
पंजीकृत आर्किटेक्टों के हितों की सुरक्षा की मांग
शिकायतकर्ता का कहना है कि नियमों का पालन करने वाले पंजीकृत आर्किटेक्ट और इंजीनियर अनियमित गतिविधियों के कारण प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने मांग की कि केवल वैध और स्वीकृत नक्शों के आधार पर ही निर्माण कार्य की अनुमति दी जाए तथा फर्जी दस्तावेजों और नियम विरुद्ध कार्य करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई की जाए।
शहर के सुनियोजित विकास का उठाया मुद्दा
पत्र में कहा गया है कि यदि समय रहते अनियमित निर्माण और फर्जी नक्शों पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में शहर की यातायात व्यवस्था, जल निकासी, पार्किंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए प्राधिकरण को इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
अब प्राधिकरण के रुख पर टिकी निगाहें
शिकायती पत्र सौंपे जाने के बाद अब लोगों की नजरें काशीपुर विकास प्राधिकरण की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कराई जाती है तो मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी। वहीं, प्राधिकरण की ओर से जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि या खंडन हो सकेगा।
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