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गौला नदी के भू-कटाव पर कांग्रेस ने घेरा: वरिष्ठ नेता दुर्गापाल और कुड़ाई ने सरकार से पूछे 9 सालों के हिसाब सहित 6 तीखे सवाल

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लालकुआं/हल्द्वानी। काठगोदाम से लेकर शांतिपुरी तक गौला नदी के तटीय क्षेत्रों में हो रहे भीषण भू-कटाव को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हेमवती नंदन दुर्गापाल ने प्रभावित ग्राम सभाओं की जनता की ओर से प्रदेश की ‘डबल इंजन’ सरकार के सामने सवालों की झड़ी लगा दी है। उन्होंने कहा कि काठगोदाम से शांतिपुरी तक नदी किनारे बसे लगभग 18 गाँव वर्षों से इस गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं, जहाँ हर साल बरसात में ग्रामीणों की कृषि भूमि, सड़कें और मकान जमींदोज हो जाते हैं, लेकिन तमाम दावों के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।

वरिष्ठ नेता हेमवती नंदन दुर्गापाल ने सरकार से जवाब मांगते हुए निम्नलिखित प्रश्न सार्वजनिक किए हैं:

  • काठगोदाम से शांतिपुरी तक गौला नदी के भू-कटाव को रोकने के लिए सरकार की स्थायी योजना क्या है, और यदि योजना है तो इसे अब तक लागू क्यों नहीं किया गया?

  • पिछले 9 वर्षों में गौला नदी पर चैनलाइजेशन, तट सुरक्षा और बोल्डर पिचिंग आदि कार्यों पर कुल कितनी धनराशि स्वीकृत हुई और कितनी खर्च की गई? सरकार इसका वर्षवार विवरण, कार्यदायी संस्था का नाम और गुणवत्ता रिपोर्ट सार्वजनिक करे।

  • इन कार्यों से अब तक कितने गाँवों में भू-कटाव स्थायी रूप से रुका और कितनी कृषि भूमि सुरक्षित हुई?

  • यदि पिछले 9 वर्षों में लगातार करोड़ों रुपये खर्च हुए हैं, तो आज भी ये 18 गाँव भू-कटाव से प्रभावित क्यों हैं?

  • क्या सरकार इस पूरे मामले का किसी स्वतंत्र एजेंसी से तकनीकी एवं वित्तीय ऑडिट कराकर उसकी रिपोर्ट जनता के सामने रखेगी?

वहीं, इस मुद्दे पर सुर में सुर मिलाते हुए कांग्रेस के एक और वरिष्ठ नेता मोहन कुड़ाई ने कहा कि गौला नदी से प्रभावित लाखों ग्रामीणों की यह जायज मांग है कि सरकार पिछले 9 वर्षों के खर्च का पूरा हिसाब-किताब सार्वजनिक करे। उन्होंने मांग की कि सरकार सिर्फ बजट ठिकाने लगाने के बजाय यह बताए कि धरातल पर उसका क्या परिणाम निकला। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि सरकार को जल्द ही भू-कटाव रोकने के लिए वैज्ञानिक एवं स्थायी समाधान की समयबद्ध कार्ययोजना घोषित करनी होगी, अन्यथा प्रभावित जनता को साथ लेकर आंदोलन तेज किया जाएगा।

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