
लालकुआँ में कमल खिलाने की हैट्रिक आसान नहीं, क्या बदलेगा चेहरा या फिर पुराने चेहरे पर ही दांव?
जनता के बीच बढ़ रही नाराजगी और स्थानीय फीडबैक से पार्टी असमंजस में, सूत्रों के अनुसार कई नामों पर मंथन।
राजू अनेजा, लालकुआँ ।उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच लालकुआँ विधानसभा सीट भाजपा के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण सीटों में गिनी जा रही है। लगातार तीसरी बार कमल खिलाने की रणनीति बना रही पार्टी को इस बार स्थानीय स्तर पर एंटी इनकंबेंसी की चर्चाओं का भी सामना करना पड़ रहा है। संगठन से जुड़े सूत्रों का दावा है कि शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच रहे फीडबैक में सीट को लेकर गंभीर मंथन चल रहा है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि चार साल के विकास कार्यों के दावों के बावजूद क्षेत्र के एक वर्ग में असंतोष दिखाई दे रहा है। खासकर बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने जैसे लंबे समय से लंबित मुद्दे, स्थानीय समस्याएं और अधूरे वादे चुनावी माहौल में फिर चर्चा का विषय बन गए हैं।
सूत्रों के अनुसार पार्टी नेतृत्व स्थानीय फीडबैक के आधार पर सभी पहलुओं का आकलन कर रहा है। यही वजह है कि टिकट को लेकर अभी किसी एक नाम पर अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। संगठन के भीतर पुराने और नए चेहरों, दोनों विकल्पों पर चर्चा होने की बात कही जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि जनता में एंटी इनकंबेंसी का असर अपेक्षा से अधिक रहा तो भाजपा नेतृत्व चुनावी रणनीति में बदलाव कर सकता है। वहीं यदि संगठन को मौजूदा जनप्रतिनिधि के पक्ष में पर्याप्त समर्थन मिलता है तो पार्टी पुराने चेहरे पर भी भरोसा जता सकती है।
फिलहाल लालकुआँ विधानसभा सीट पर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा मौजूदा चेहरे के साथ हैट्रिक की कोशिश करेगी या फिर एंटी इनकंबेंसी की चुनौती से पार पाने के लिए किसी नए चेहरे पर दांव लगाएगी?
(नोट: टिकट को लेकर भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। पार्टी के संभावित उम्मीदवारों को लेकर चल रही चर्चाएं संगठनात्मक सूत्रों और राजनीतिक हलकों में हो रही चर्चाओं पर आधारित हैं।)

