सियासी तूफान के बाद जब प्रशासन हुआ खामोश,तो पांडे ने फोड़ा ‘लेटर बम’—सरकारी ज़मीन है तो कब्ज़ा लो

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राजू अनेजा,गदरपुर। अतिक्रमण को लेकर उठे सियासी तूफान के बीच जब प्रशासनिक कार्रवाई ठंडी पड़ती दिखी, तो पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे ने ऐसा कदम उठा दिया जिसने पूरे प्रकरण को नया मोड़ दे दिया। नोटिस चस्पा होने और समयसीमा बीत जाने के बाद भी जब तहसील स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो पांडे ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर साफ शब्दों में कहा—यदि यह सरकारी भूमि है तो मेरी उपस्थिति में चिन्हीकरण कर कब्ज़ा ले लिया जाए।
मामला सन्तोषनगर वार्ड नं. 3, गूलरभोज स्थित उनके कैम्प कार्यालय एवं आवास से जुड़ा है। 19 जनवरी 2026 को तहसील प्रशासन, गदरपुर, की ओर से नोटिस चस्पा कर परिसर को अतिक्रमण में दर्शाया गया था। लेकिन तय समयसीमा के भीतर कार्रवाई न होना अब चर्चा और सवालों का केंद्र बन गया है।
“मुझे और मेरे वारिसान को कोई आपत्ति नहीं”
अपने पत्र में पांडे ने स्पष्ट लिखा कि चिन्हीकरण उनकी मौजूदगी में किया जाए और यदि भूमि सरकारी है तो उसे प्रशासन अपने कब्जे में ले। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें और उनके वारिसों को कोई आपत्ति नहीं है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
स्थानीय स्तर पर यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या प्रशासन दबाव में है या फिर कार्रवाई में अनावश्यक ढिलाई बरती जा रही है? आम नागरिकों के मामलों में जहां त्वरित कार्रवाई देखने को मिलती है, वहीं इस प्रकरण में देरी ने संदेह और बहस को जन्म दिया है।
सियासी संदेश या रणनीति?
राजनीतिक हलकों में पांडे के इस ‘लेटर बम’ को दो नजरियों से देखा जा रहा है—एक, कानून के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाने की कोशिश; दूसरा, प्रशासनिक निष्क्रियता को सार्वजनिक रूप से उजागर करने की रणनीति।
अब पूरा मामला जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिका है। क्या प्रशासन मौके पर पहुंचकर चिन्हीकरण और कब्जे की कार्रवाई करेगा, या फिर यह सियासी तूफान और तेज होगा—यह आने वाला वक्त तय करेगा।

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