
राजू अनेजा, काशीपुर। शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह व्यक्ति के चरित्र, चिंतन और व्यवहार को गढ़ने की प्रक्रिया है। इसी उद्देश्य के साथ श्रीराम इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (एसआईएमटी) के स्नातकोत्तर सभागार में एक प्रेरक विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में Indian Institute of Technology Roorkee के प्राध्यापक (उच्च प्रशासनिक श्रेणी) एवं सुप्रसिद्ध मूल्य शिक्षाविद् Navneet Arora उपस्थित रहे।

“उच्च भावनाएँ और मानवीय संबंध” पर गहन मंथन
अपने व्याख्यान “उच्च भावनाएँ और मानवीय संबंध” विषय पर डॉ. नवनीत अरोड़ा ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को जीवन के मूल प्रश्नों से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि आज का युग प्रतिस्पर्धा का है, किंतु प्रतिस्पर्धा के बीच मनुष्य यदि अपने मूल्यों और संबंधों को खो देता है तो उपलब्धियाँ भी अधूरी रह जाती हैं।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वास्तविक सफलता वह है जो व्यक्ति को आंतरिक शांति, संतोष और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का भाव प्रदान करे। केवल पद, प्रतिष्ठा और आर्थिक समृद्धि जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं हो सकते। यदि मन में उच्च भावनाएँ — जैसे करुणा, सहयोग, कृतज्ञता और सहानुभूति — विकसित हों, तभी जीवन सार्थक बनता है।
डॉ. अरोड़ा ने अनेक जीवन प्रसंगों और उदाहरणों के माध्यम से यह समझाया कि सकारात्मक भावनाएँ ही स्वस्थ मानवीय संबंधों की आधारशिला हैं। उनका वक्तव्य सरल, प्रभावशाली और संवेदनशील शैली में प्रस्तुत हुआ, जिससे पूरा सभागार एकाग्र होकर सुनता रहा। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे और अपने अनुभव साझा किए।
“जीवन पाने से नहीं, देने से बनता है”
“जो देते हैं, वही जीवन बनता है
डॉ. अरोड़ा का प्रसिद्ध संदेश —
“हम जो पाते हैं उससे जीवन चलता है, लेकिन हम जो देते हैं उससे जीवन बनता है” —
कार्यक्रम का सबसे प्रभावशाली क्षण साबित हुआ।
गौरतलब है कि डॉ. अरोड़ा कई प्रेरणादायी पुस्तकों के लेखक हैं और Better Life Training Institute के संस्थापक के रूप में देश-विदेश में सैकड़ों प्रेरक व्याख्यान दे चुके हैं।
विशिष्ट अतिथि की सीख
भोपाल से पधारे विशिष्ट अतिथि Rajesh Ramani ने विद्यार्थियों को ऐसे सत्रों से अधिकतम सीख लेने और जीवन में मूल्यों को व्यवहार में उतारने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि “ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह व्यवहार में दिखे।”
संस्थान परिवार ने जताया आभार
कार्यक्रम के अंत में संस्थान के अध्यक्ष Ravindra Kumar, निदेशक प्रो० (डॉ०) Yograj Singh तथा प्राचार्य डॉ० S. S. Kushwaha ने मुख्य वक्ता एवं विशिष्ट अतिथि के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संस्थान भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा, जिससे विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।
समग्र रूप से यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के मन में उच्च विचारों और मानवीय मूल्यों के बीज रोपने का सशक्त प्रयास सिद्ध हुआ।

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