सीएम धामी के निर्देशों के बाद, अब राज्य की 83 प्रमुख चोटियों पर चढ़ना भारतीय पर्वतारोहियों के लिए पूरी तरह नि:शुल्क
उत्तराखंड सरकार ने साहसिक पर्यटन (Adventure Tourism) और पर्वतारोहण को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के बाद, अब राज्य की 83 प्रमुख चोटियों पर चढ़ना भारतीय पर्वतारोहियों के लिए पूरी तरह नि:शुल्क होगा।
इस निर्णय से उत्तराखंड आने वाले साहसिक पर्यटकों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी और राज्य “माउंटेनियरिंग हब” के रूप में उभरेगा।
🏔️ पर्वतारोहण शुल्क में बड़े बदलाव: एक नज़र में
पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के अनुसार, वन विभाग और पर्यटन विकास परिषद के समन्वय से निम्नलिखित नई व्यवस्था लागू की गई है:
| विवरण | पुरानी व्यवस्था | नई व्यवस्था (2026) |
| भारतीय पर्वतारोही | ₹10,000 से ₹14,000 प्रति व्यक्ति | ₹0 (पूरी तरह मुफ्त) |
| विदेशी पर्वतारोही | वन विभाग शुल्क + IMF शुल्क | केवल IMF शुल्क (वन विभाग शुल्क समाप्त) |
| चोटियों की ऊंचाई | – | 5700 मीटर से 7756 मीटर तक |
🎯 इस पहल के मुख्य उद्देश्य
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साहसिक पर्यटन को बढ़ावा: शुल्क हटने से युवाओं और पेशेवर पर्वतारोहियों का रुझान उत्तराखंड की चोटियों की ओर बढ़ेगा।
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आर्थिक गतिविधियों में तेजी: जब पर्वतारोही आएंगे, तो स्थानीय गाइड, पोर्टर, होमस्टे और परिवहन व्यवसाय को सीधा लाभ मिलेगा।
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वैश्विक पहचान: विदेशी पर्वतारोहियों के लिए प्रक्रिया को सरल बनाने से नंदा देवी, त्रिशूल और कामेट जैसी चोटियों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्यटन बढ़ेगा।
📍 अधिसूचित चोटियाँ
अधिसूचना के तहत राज्य की 83 चोटियों को शामिल किया गया है। इनमें कई ऐसी चोटियाँ हैं जिनकी ऊंचाई 7756 मीटर (जैसे कामेट पर्वत) तक है। इन दुर्गम और ऊंची चोटियों पर पहले भारी शुल्क देना पड़ता था, जिससे कई पर्वतारोही अन्य राज्यों या देशों का रुख करते थे।
💡 पर्वतारोहियों के लिए सुझाव
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अनुमति अनिवार्य: हालांकि शुल्क हटा दिया गया है, लेकिन सुरक्षा और ट्रैकिंग के लिए पंजीकरण (Registration) और आवश्यक अनुमति की प्रक्रिया अभी भी अनिवार्य रहेगी।
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पर्यावरण संरक्षण: पर्यटन विभाग ने अपील की है कि “जीरो वेस्ट” नीति का पालन करें ताकि हिमालय की चोटियों की स्वच्छता बनी रहे।

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