‘जहर का स्वाद’ चखने के चक्कर में 4 सहेलियों की मौत, एक बची

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बिहार के औरंगाबाद जिले के दाउदनगर अनुमंडल स्थित बिगहा गांव से एक ऐसी विचलित कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने सबको झकझोर कर रख दिया है। महज जिज्ञासा और “देखते हैं मरते हैं या नहीं” की शर्त ने चार मासूम बच्चियों की जान ले ली। यह घटना 29 जनवरी की है, जिसे शुरुआत में छिपाने की कोशिश की गई थी, लेकिन अब जाकर पुलिसिया जांच में चौंकाने वाले सच सामने आए हैं।


🌑 घटनाक्रम: एक खतरनाक ‘टेस्ट’ और चीखें

पुलिस जांच और जीवित बची पांचवीं सहेली के बयान के अनुसार घटना का सिलसिला कुछ इस प्रकार था:

  • खेत में मजमा: पांचों सहेलियां (उम्र 12-15 साल) पास के एक खेत में इकट्ठा हुईं।

  • जहरीली चुनौती: एक सहेली के पास बगुलों को मारने वाला जहर था। उसने कथित तौर पर कहा कि चलो देखते हैं इसका स्वाद कैसा है। जब दूसरी ने मौत का डर जताया, तो उन्हें उकसाया गया— “देखते हैं, इसे खाने से मरते हैं या नहीं।”

  • मौत का घूंट: पांचों ने पानी के साथ वह जहर निगल लिया।

  • बचने वाली सहेली: जैसे ही पहली लड़की जहर खाते ही बेहोश हुई, पांचवीं लड़की डर गई और उसने तुरंत जहर मुंह से थूक दिया। वह भागकर घर पहुंची, जहां उसे नीम का पानी पिलाकर बचा लिया गया। लेकिन जब तक लोग खेत पहुंचे, अन्य चार लड़कियों की मौत हो चुकी थी।


🕵️ पुलिस जांच बनाम परिजनों के दावे

इस मामले में पुलिस और मृतकों के परिवारों के बीच बयानों का बड़ा विरोधाभास है:

  • परिजनों का पक्ष: मृतक बच्चियों के पिताओं (जो प्रवासी मजदूर हैं) का दावा है कि यह केवल जिज्ञासा में किया गया एक हादसा था। उन्होंने लोक-लाज और डर के मारे घटना को छिपाया और चारों का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार कर दिया।

  • पुलिस का संदेह (SDPO का बयान): दाउदनगर एसडीपीओ अशोक कुमार दास के अनुसार, इसमें ‘लव एंगल’ और पारिवारिक डांट की बात भी सामने आ रही है। पुलिस को संदेह है कि घटना से एक दिन पहले लड़कियों को लड़कों के साथ देखने पर परिजनों ने उन्हें डांटा था, जिसके कारण उन्होंने सामूहिक आत्महत्या जैसा कदम उठाया होगा।


📋 अनसुलझे सवाल और पुलिस की कार्रवाई

पुलिस अब इन मुख्य बिंदुओं पर अपनी जांच केंद्रित कर रही है:

  1. जहर का स्रोत: बच्चियों के पास बगुलों को मारने वाला घातक जहर आखिर पहुँचा कैसे?

  2. मामला दबाना: आखिर इतनी बड़ी घटना को छिपाने और बिना पुलिस को सूचना दिए अंतिम संस्कार करने के पीछे परिजनों की असल मजबूरी क्या थी?

  3. मानसिक दबाव: क्या यह वाकई जिज्ञासा थी या किसी गहरे सामाजिक दबाव का नतीजा?


💔 दुखों का पहाड़

मृतक चारों लड़कियां अत्यंत गरीब परिवारों से थीं। उनके पिता बाहर रहकर मजदूरी करते हैं। इस घटना ने पूरे बिगहा गांव में मातम और सन्नाटा पसरा दिया है। पुलिस जीवित बची लड़की को मुख्य गवाह मानकर मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है।


एक संदेश: बच्चों में बढ़ती जिज्ञासा और इंटरनेट या समाज से मिलने वाली गलत जानकारियों पर नजर रखना जरूरी है। छोटी सी “कोशिश” भी जानलेवा साबित हो सकती है।

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