गर्जिया मंदिर अपडेट: 30 मई तक मुख्य मंदिर में श्रद्धालुओं का प्रवेश वर्जित; टीले को बचाने के लिए युद्धस्तर पर कार्य जारी
रामनगर (29 अप्रैल 2026): विश्व प्रसिद्ध गर्जिया देवी मंदिर के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे को देखते हुए सिंचाई विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। मंदिर के कमजोर हो चुके टीले को मजबूती देने के लिए चल रहे दूसरे चरण के निर्माण कार्य के कारण अब श्रद्धालु 30 मई तक मुख्य मंदिर में दर्शन नहीं कर सकेंगे। सिंचाई विभाग ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा कारणों से यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया है।
क्यों बंद किया गया मुख्य मंदिर?
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता अजय कुमार जॉन ने बताया कि मां गिरिजा देवी जिस टीले पर विराजमान हैं, वह 2010 की बाढ़ के बाद से काफी संवेदनशील हो चुका है।
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चुनौतीपूर्ण कार्य: नदी के भीतर करीब 5 मीटर तक खुदाई की जा रही है, जहाँ पानी का रिसाव लगातार बना हुआ है। भारी मशीनों और कंक्रीट संरचना के निर्माण के दौरान श्रद्धालुओं की मौजूदगी जोखिम भरी हो सकती है।
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समयावधि में विस्तार: पहले मंदिर को 30 अप्रैल तक बंद रखने का आदेश था, लेकिन कार्य की जटिलता को देखते हुए अब इसे 30 मई तक बढ़ाया जा रहा है। यदि जरूरत पड़ी तो इसे 15 जून तक भी विस्तारित किया जा सकता है।
श्रद्धालुओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था
श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस न पहुँचे, इसके लिए मंदिर समिति और प्रशासन ने वैकल्पिक इंतजाम किए हैं:
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चरण पादुका दर्शन: मुख्य मंदिर बंद रहने के दौरान श्रद्धालु परिसर के दूसरे छोर पर स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में मां गिरिजा देवी की चरण पादुका के दर्शन कर पुण्य लाभ ले सकेंगे।
मानसून से पहले सुरक्षा दीवार का लक्ष्य
विभाग का मुख्य लक्ष्य मानसून सीजन शुरू होने से पहले टीले के चारों ओर एक मजबूत सुरक्षा दीवार और कंक्रीट का ढांचा तैयार करना है।
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हाई फ्लड लेवल (HFL): अभियंता के अनुसार, कार्य को हाई फ्लड लेवल तक पहुँचाना जरूरी है ताकि बरसात में कोसी नदी का उफान टीले को और नुकसान न पहुँचा सके।
प्रशासन की अपील
सिंचाई विभाग और स्थानीय प्रशासन ने देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि यह पाबंदी भविष्य में इस ऐतिहासिक आस्था केंद्र को सुरक्षित रखने के लिए ही लगाई गई है। फिलहाल विभागीय टीम और विशेषज्ञ मौके पर चौबीसों घंटे कार्य की निगरानी कर रहे हैं।
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