हरीश रावत का ‘नवरात्रि संकल्प’: बिजली-पानी की बढ़ती दरों के खिलाफ मौन उपवास; 15 दिनों तक राजनीतिक ‘वनवास’ का किया ऐलान

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देहरादून (27 मार्च 2026): डिफेंस कॉलोनी स्थित अपने आवास पर शुक्रवार को हरीश रावत भक्ति और विरोध के एक अनूठे संगम में नजर आए। जहाँ एक ओर उन्होंने मां जगदंबा से जनता के कष्ट हरने की प्रार्थना की, वहीं दूसरी ओर सरकार की नीतियों पर ‘मौन’ प्रहार किया।

1. क्यों रखा मौन उपवास?

  • महंगाई की मार: रावत के अनुसार, हालांकि इस सीजन में अभी दरें आधिकारिक रूप से नहीं बढ़ी हैं, लेकिन आम जनता पहले से ही पिछले बोझ से “झुलस” रही है।

  • जनता को समर्पण: उन्होंने अपना यह उपवास उन लाखों परिवारों को समर्पित किया है जो भारी-भरकम बिजली और पानी के बिलों के कारण आर्थिक संकट झेल रहे हैं।

  • आध्यात्मिक मार्ग: उन्होंने प्रार्थना की कि मां जगदंबा कोई ऐसा रास्ता निकालें जिससे आम जनमानस का बोझ कम हो सके।

2. 15 दिनों का ‘राजनीतिक एकांतवास’

हरीश रावत ने घोषणा की है कि अगले 15 दिनों तक वह:

  • मीडिया से दूरी: किसी भी प्रेस वार्ता या साक्षात्कार में हिस्सा नहीं लेंगे।

  • राजनीतिक कार्यक्रम: किसी भी रैली, बैठक या इंडिया गठबंधन के कार्यक्रमों में शामिल नहीं होंगे।

  • आत्मचिंतन: उन्होंने इसे “भूतकाल की तरफ देखकर भविष्य के लिए सोच विकसित करने” का समय बताया है।

3. 1 अप्रैल से लगने वाला है ‘करंट’

उत्तराखंड में नए वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल 2026) से आम जनता को दोहरे झटके की संभावना है:

  • बिजली दरें: घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए टैरिफ में बढ़ोतरी प्रस्तावित है।

  • पानी के बिल: जल संस्थान और जल निगम की ओर से दरों में वृद्धि की तैयारी है, जिसका सीधा असर घर, दुकान और ऑफिस के बजट पर पड़ेगा।

4. पुरानी मांगों का सिलसिला

यह पहली बार नहीं है जब रावत ने उपवास का सहारा लिया हो। बीते महीने भी उन्होंने बिंदुखत्ता, बापूग्राम और पुछड़ी जैसे इलाकों को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने और आपदा पीड़ितों के हक के लिए गांधी पार्क में एक घंटे का मौन रखा था।


Snapshot: हरीश रावत का ‘एक्शन प्लान’ (मार्च-अप्रैल 2026)

विवरण जानकारी
स्थान डिफेंस कॉलोनी आवास, देहरादून
मुख्य मुद्दा बिजली और पानी की बढ़ती दरें
घोषणा 15 दिन तक राजनीतिक कार्यक्रमों से विरक्ति
उद्देश्य जनसमस्याओं पर ध्यान आकर्षण और आत्मचिंतन
संभावित खतरा 1 अप्रैल से उत्तराखंड में बिजली-पानी महंगा होना

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