हरीश रावत की हुंकार; वन ग्रामों को राजस्व गांव बनाने की मांग पर निकाली पदयात्रा, सरकार और सांसद पर साधा निशाना

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रामनगर (12 मार्च 2026): वन ग्रामों में दशकों से रह रहे परिवारों को मालिकाना हक दिलाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गुरुवार को रामनगर की सड़कों पर उतरकर शक्ति प्रदर्शन किया। सुंदरखाल और पुछड़ी जैसे क्षेत्रों से आए सैकड़ों लोगों ने इस पदयात्रा में शामिल होकर अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से उठाया।

1. महाविद्यालय से तहसील तक पदयात्रा

पदयात्रा का आगाज रामनगर महाविद्यालय के बाहर से हुआ, जहाँ बड़ी संख्या में वन ग्रामों के निवासी एकत्रित हुए थे:

  • नेतृत्व: पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ उपज्येष्ठ प्रमुख संजय नेगी ने यात्रा का नेतृत्व किया।

  • जनसंपर्क: यात्रा के दौरान हरीश रावत अपने चिरपरिचित अंदाज में पुराने परिचितों और व्यापारियों से आत्मीयता के साथ मिलते नजर आए।

  • रूट: लखनपुर, रानीखेत रोड और ब्लॉक कार्यालय होते हुए पदयात्रा तहसील परिसर पहुँची, जहाँ यह एक जनसभा में तब्दील हो गई।

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2. “बिल्डर्स को जमीन, गरीबों को अतिक्रमणकारी”: रावत का तीखा हमला

तहसील परिसर में जनसभा को संबोधित करते हुए हरीश रावत ने सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया:

  • दोहरा मापदंड: रावत ने कहा कि सरकार के पास बड़े-बड़े बिल्डर्स को देने के लिए जमीन उपलब्ध है, लेकिन जो लोग पीढ़ियों से यहाँ बसे हैं, उन्हें ‘अतिक्रमणकारी’ बताकर प्रताड़ित किया जा रहा है।

  • मालिकाना हक: उन्होंने मांग की कि सरकार को इन वन ग्रामों को तत्काल राजस्व ग्राम घोषित कर निवासियों को भूमिधरी अधिकार देने चाहिए।

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3. सांसद अनिल बलूनी पर वादाखिलाफी का आरोप

सभा के दौरान वन ग्रामों के मनोनीत प्रधानों और वक्ताओं ने स्थानीय सांसद अनिल बलूनी को भी घेरा:

  • वादाखिलाफी: वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सांसद ने चुनाव के समय वन ग्रामों को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने का वादा किया था, जिसे वे अब पूरी तरह भूल चुके हैं।

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Snapshot: विरोध प्रदर्शन के मुख्य बिंदु

विवरण जानकारी
मुख्य नेतृत्व हरीश रावत (पूर्व मुख्यमंत्री)
प्रमुख मांग वन ग्रामों (सुंदरखाल, पुछड़ी आदि) को राजस्व गांव का दर्जा
मार्ग महाविद्यालय से तहसील परिसर (रामनगर)
शामिल प्रमुख चेहरे संजय नेगी, मंजू नेगी, पुष्कर दुर्गापाल, ताइफ़ खान
अगली रणनीति आंदोलन को व्यापक संघर्ष का हिस्सा बनाने की चेतावनी

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