उत्तराखंड: परिवार रजिस्टर अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच, CM धामी ने दिए कठोर कार्रवाई के निर्देश
देहरादून: उत्तराखंड में परिवार रजिस्टर (Family Register) में सामने आ रही गंभीर अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री ने राज्य में जनसांख्यिकीय संतुलन को प्रभावित करने वाली इन संभावित अनियमितताओं पर गंभीर रुख अपनाया और व्यापक जांच के स्पष्ट निर्देश दिए।
🔎 जांच और सुरक्षा के निर्देश
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जांच का दायरा: वर्ष 2003 से अब तक हुई संभावित अनियमितताओं की पहचान करने के लिए जांच का दायरा विस्तृत किया गया है।
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अभिलेखों की सुरक्षा: मुख्यमंत्री ने तत्काल निर्देश दिया कि प्रदेश के सभी जिलों में उपलब्ध परिवार/कुटुंब रजिस्टरों की प्रतियाँ तुरंत संबंधित जिलाधिकारी (DM) के पास सुरक्षित रखी जाएँ, ताकि अभिलेखों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना समाप्त हो जाए।
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जांच का स्तर: परिवार रजिस्टरों की गहन जांच CDO/ADM स्तर पर कराए जाने का निर्णय लिया गया है।
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कार्रवाई: फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज कराने वालों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
🌐 नियमावली और प्रक्रिया
मुख्यमंत्री ने पंचायती राज (कुटुंब रजिस्टरों का अनुरक्षण) नियमावली, 1970 के तहत संचालित प्रक्रिया को स्पष्ट किया:
| प्रक्रिया | अधिकार निहित |
| नाम दर्ज करने का अधिकार | सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) |
| अपील का अधिकार | उप जिलाधिकारी (SDM) |
| ऑनलाइन उपलब्धता | अपणी सरकार पोर्टल |
📈 जनसांख्यिकीय संतुलन पर चिंता
बैठक में यह तथ्य सामने आया कि बीते वर्षों में राज्य की सीमा से लगे मैदानी जनपदों के ग्रामीण क्षेत्रों में अनधिकृत बसावट के कारण परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज होने से जनसांख्यिकीय संतुलन प्रभावित होने की आशंका रही है। इसी पृष्ठभूमि में नियमावली में आवश्यक संशोधन की आवश्यकता महसूस की गई है।
📊 आवेदनों का विश्लेषण (वर्ष 2025)
पंचायती राज विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 01 अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 के बीच प्राप्त आवेदनों की स्थिति:
| आवेदन का प्रकार | संख्या |
| नए परिवार जोड़ने हेतु प्राप्त आवेदन | 2,66,294 |
| स्वीकृत आवेदन | 2,60,337 |
| निरस्त आवेदन | 5,429 |
विशेषज्ञों का मानना है कि निरस्त आवेदनों की बड़ी संख्या फर्जी प्रविष्टियों की आशंका की ओर संकेत करती है।
✅ मुख्यमंत्री का कठोर रुख
मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि सरकारी अभिलेखों से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने निर्देशित किया कि सीमावर्ती जिलों सहित सभी जिलों में समान रूप से जांच की जाए। भविष्य में परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने की प्रक्रिया को एक स्पष्ट नीति के अंतर्गत नियंत्रित कर कैबिनेट में प्रस्तुत करने का भी निर्णय लिया गया।
इस उच्चस्तरीय बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें सचिव गृह शैलेश बगौली, डीजीपी दीपम सेठ, डीजीपी इंटेलिजेंस अभिनव कुमार, विशेष सचिव पंचायती राज डॉ. पराग धकाते और निदेशक पंचायती राज निधि यादव शामिल थे।

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