कैसे होगा उत्तराखण्ड का विकास? सांसद निधि खर्च करने में ही उत्तराखंड के सांसद सुस्त, अभी तक केवल 18 प्रतिशत सांसद निधि हुई खर्च

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राजू अनेजा, काशीपुर।जनता अपने जनप्रतिनिधियों को इस उम्मीद के साथ चुनती है कि वे क्षेत्र के विकास को गति देंगे और सरकार से मिलने वाली करोड़ों की सांसद निधि को सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत जरूरतों पर खर्च करेंगे। लेकिन उत्तराखंड के सांसद इस कसौटी पर फिलहाल खरे नहीं उतर पा रहे हैं। ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि दिसंबर 2025 तक आवंटित कुल सांसद निधि का महज़ 18 प्रतिशत ही खर्च हो सका है।
यह चौंकाने वाला खुलासा ग्राम्य विकास आयुक्त, उत्तराखंड कार्यालय द्वारा सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन एडवोकेट को उपलब्ध कराई गई सूचना से हुआ है।
95.90 करोड़ आवंटित, खर्च सिर्फ 17.73 करोड़ के आसपास
दिसंबर 2025 तक उत्तराखंड के कुल 8 सांसदों (5 लोकसभा, 3 राज्यसभा) को कुल 95.90 करोड़ रुपये की सांसद निधि आवंटित हुई।
5 लोकसभा सांसदों को: 49 करोड़ रुपये
3 राज्यसभा सांसदों को: 46.90 करोड़ रुपये
लेकिन पूर्ण एवं प्रचलित कार्यों पर कुल मिलाकर केवल 7.08 करोड़ रुपये पूर्ण कार्यों पर और 10.65 करोड़ रुपये चल रहे कार्यों पर खर्च हुए — यानी कुल मिलाकर लगभग 18 प्रतिशत।
लोकसभा सांसदों का प्रदर्शन बेहद कमजोर
लोकसभा के 5 सांसदों की स्थिति और भी चिंताजनक है।
पूर्ण कार्यों पर खर्च: 2.089 करोड़ रुपये
अपूर्ण/चल रहे कार्यों पर खर्च: 1.191 करोड़ रुपये
कुल खर्च: केवल 7 प्रतिशत
सांसदवार स्थिति (लोकसभा)
अजय भट्ट (नैनीताल-उधमसिंह नगर) – 18% खर्च (सबसे अधिक)
316 कार्य प्रस्तावित
229 स्वीकृत
54 पूर्ण, 154 चल रहे, 21 शुरू नहीं
माला राज लक्ष्मी शाह (टिहरी गढ़वाल) – 14% खर्च
128 प्रस्तावित
89 स्वीकृत
11 पूर्ण, 64 चल रहे, 14 शुरू नहीं
अनिल बलूनी (गढ़वाल) – खर्च शून्य
4 प्रस्तावित, 2 स्वीकृत
1 पूर्ण, 1 चल रहा
खर्च दर्शाया गया: 0
अजय टम्टा (अल्मोड़ा) – 1% से कम
4 स्वीकृत
2 प्रारंभ नहीं, 2 चल रहे
खर्च: 0.041 करोड़
त्रिवेंद्र सिंह रावत (हरिद्वार) – 1% से कम
16 प्रस्तावित, 10 स्वीकृत
1 पूर्ण, 5 चल रहे, 4 शुरू नहीं
खर्च: 0.080 करोड़
राज्यसभा सांसद अपेक्षाकृत आगे
राज्यसभा सांसदों का प्रदर्शन लोकसभा से बेहतर रहा है।
नरेश बंसल – 47% खर्च
191 प्रस्तावित
144 स्वीकृत
23 पूर्ण, 92 चल रहे, 29 प्रारंभ नहीं
कल्पना सैनी – 27% खर्च
121 प्रस्तावित
89 स्वीकृत
26 पूर्ण, 60 चल रहे, 3 प्रारंभ नहीं
महेन्द्र भट्ट – 6% खर्च
44 प्रस्तावित
23 स्वीकृत
2 पूर्ण, 7 चल रहे, 14 प्रारंभ नहीं
232 कार्य स्वीकृत ही नहीं, 87 कार्य शुरू तक नहीं हुए
आंकड़ों के अनुसार:
232 प्रस्तावित कार्य अधिकारियों ने स्वीकृत ही नहीं किए
87 स्वीकृत कार्य दिसंबर 2025 तक शुरू नहीं हुए
यह स्थिति सवाल खड़े करती है —
क्या प्रस्तावों में कमी है?
क्या प्रशासनिक अड़चनें हैं?
या फिर विकास योजनाएं कागज़ों में ही सीमित हैं?
जनता के सवाल, जवाब किसके पास?
जब करोड़ों रुपये की निधि विकास के नाम पर आवंटित हो और उसका बड़ा हिस्सा खर्च ही न हो पाए, तो स्वाभाविक है कि जनता सवाल उठाए।
सांसद निधि का उद्देश्य स्थानीय जरूरतों के अनुरूप त्वरित विकास कार्य कराना है। लेकिन उत्तराखंड में निधि खर्च की धीमी रफ्तार विकास की गति पर भी सवाल खड़े कर रही है।
अब देखना होगा कि आने वाले महीनों में सांसद और प्रशासन इस सुस्ती को दूर कर पाते हैं या फिर विकास की गाड़ी यूं ही धीमी रफ्तार से चलती रहेगी।

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