
पुलभट्टा में पुलिस का छापा, दो महिलाओं समेत चार तस्कर गिरफ्तार
राजू अनेजा,किच्छा।जब इंसानी लालच हदें लांघता है, तब प्रकृति की सांसें घुटने लगती हैं। शनिवार सुबह पुलभट्टा क्षेत्र में ऐसा ही दिल दहला देने वाला मंजर सामने आया, जब पिट्ठू बैगों में ठूंसकर ले जाए जा रहे 91 जिंदा कछुओं को पुलिस ने मौत के सौदे से ऐन वक्त पर बचा लिया।
पुलभट्टा पुलिस ने दो महिलाओं समेत चार तस्करों को गिरफ्तार कर वन्यजीव तस्करी के एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।
शनिवार सुबह एसआई दिनेश भट्ट के नेतृत्व में पुलिस टीम बरेली मुख्य मार्ग पर ग्राम सुतईया के पास गश्त कर रही थी। इसी दौरान दो महिला और दो पुरुष पिट्ठू बैग लेकर संदिग्ध अवस्था में खड़े दिखाई दिए। पूछताछ में संतोषजनक जवाब न मिलने पर पुलिस ने बैगों की तलाशी ली, तो भीतर जिंदा कछुओं की खेप देख टीम भी सन्न रह गई।
पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि वे इटावा (उत्तर प्रदेश) से कछुए खरीदकर रुद्रपुर में एक व्यक्ति को सौंपने जा रहे थे, जहां इन्हें काटकर एक हजार रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचने की तैयारी थी।
पुलिस के अनुसार,
ओमा पत्नी महिपाल के दो बैगों से 38 कछुए,
19 वर्षीय कामनी पत्नी दीपू के बैग से 18 कछुए,
इटावा निवासी विष्णु और सनी के बैगों से क्रमशः 17 व 18 कछुए बरामद किए गए।
सभी आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
“कछुओं की तस्करी संगठित तरीके से की जा रही थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह खेप रुद्रपुर में खपाई जानी थी। नेटवर्क के अन्य लोगों तक पहुंचने के लिए गहन जांच की जा रही है।”
— उत्तम सिंह नेगी, पुलिस अधीक्षक
क्यों होती है कछुओं की तस्करी?
कछुए और उनके अंडे मांस व कथित दवाओं के लिए ऊंचे दामों पर बिकते हैं।
अंधविश्वास में इनके खून और खोल को ताकत, लंबी उम्र व यौन क्षमता बढ़ाने वाला माना जाता है, जबकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं।
तंत्र-मंत्र, टोना-टोटका और शुभ मान्यताओं के नाम पर अवैध खरीद-फरोख्त।
कुछ प्रजातियों की तस्करी एक्वेरियम व पालतू रखने के लिए भी की जाती है।
कछुए जलाशयों की प्राकृतिक सफाई करते हैं। इनके खत्म होने से जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचता है और कई प्रजातियां विलुप्ति के कगार पर हैं।
क्या कहता है कानून
कछुओं का शिकार, पकड़ना और बेचना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत गंभीर अपराध।
अधिकांश कछुआ प्रजातियां अनुसूची-1 में शामिल।
दोष सिद्ध होने पर 7 साल तक की सजा और भारी जुर्माना।
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