उत्तराखंड में आवारा पशुओं को पालने पर मिलेंगे ₹12,000 प्रतिमाह: सरकार ने शुरू की दो शानदार योजनाएं, ऐसे उठाएं
पिथौरागढ़/देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने सड़कों और खेतों में घूम रहे निराश्रित पशुओं के प्रबंधन के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। पशुपालन विभाग द्वारा शुरू की गई दो नई योजनाओं के जरिए अब ग्रामीण न केवल अपनी फसलों को बचा सकेंगे, बल्कि आवारा पशुओं को आश्रय देकर हर महीने 12 हजार रुपये तक की कमाई भी कर सकेंगे।
📋 कौन सी हैं ये दो योजनाएं?
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (CVO) डॉ. योगेश शर्मा ने इन योजनाओं का विवरण साझा किया है:
1. ग्राम गौर सेवक योजना (छोटे स्तर के लिए)
यह योजना उन ग्रामीणों के लिए है जो अपने घर या बाड़े में पशुओं को रख सकते हैं।
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शर्त: इसमें अधिकतम 5 नर आवारा पशुओं को पाला जा सकता है।
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भुगतान: सरकार प्रति पशु 80 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान करेगी।
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कमाई: यदि कोई व्यक्ति 5 पशु रखता है, तो उसे प्रतिमाह 12,000 रुपये मिलेंगे।
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अतिरिक्त लाभ: इन पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण और चिकित्सा देखभाल विभाग द्वारा निशुल्क दी जाएगी।
2. गौशाला योजना (बड़े स्तर के लिए)
यह योजना उनके लिए है जो बड़े स्तर पर गौसदन चलाना चाहते हैं।
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क्षमता: इसमें पशुओं की संख्या की कोई सीमा नहीं है।
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भुगतान: यहाँ भी प्रति पशु 80 रुपये प्रतिदिन की दर से सहायता राशि दी जाएगी।
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वर्तमान स्थिति: जिले के मुनस्यारी और बारावे में दो गौशालाएं पहले से ही 225 पशुओं को आश्रय दे रही हैं।
🌾 इस पहल से होंगे ‘दोहरे फायदे’
अधिकारियों के अनुसार, इन योजनाओं को मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे दो बड़े लाभ होंगे:
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फसल सुरक्षा: खेतों में आवारा मवेशियों द्वारा होने वाले नुकसान पर लगाम लगेगी।
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पशु कल्याण: निराश्रित पशुओं को सुरक्षित आश्रय, पौष्टिक भोजन और उचित इलाज मिल सकेगा।
📍 वर्तमान प्रगति
पिथौरागढ़ जिले में ‘ग्राम गौर सेवक योजना’ का लाभ वर्तमान में 6 व्यक्ति उठा रहे हैं। विभाग का लक्ष्य इसे और अधिक विस्तार देना है ताकि सड़कों पर दुर्घटनाएं कम हों और किसानों की आय में वृद्धि हो।

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