
राजू अनेजा, काशीपुर।कागजों में वैध कारोबार और हकीकत में नशे का जाल—काशीपुर पुलिस ने ऑपरेशन प्रहार के तहत एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए महिला संचालक को गिरफ्तार कर लिया है। लंबे समय से फरार चल रही अभियुक्ता रमीशा चौहान को पकड़कर पुलिस ने इस नेटवर्क की अहम कड़ी को तोड़ दिया है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर चल रही कार्रवाई में पुलिस अधीक्षक काशीपुर व क्षेत्राधिकारी बाजपुर के पर्यवेक्षण में कोतवाली प्रभारी हरेंद्र चौधरी के नेतृत्व में टीम ने 24 अप्रैल 2026 को सटीक सूचना के आधार पर दबिश देकर आरोपी को गिरफ्तार किया।
कैसे हुआ नशे के नेटवर्क का खुलासा?
18 नवंबर 2025 को मुख्य आरोपी दीपक ठाकुर के पास से 5000 से अधिक प्रतिबंधित बुप्रेनोर्फिन इंजेक्शन बरामद हुए थे। इसके बाद जांच गहराई तक पहुंची तो करीब 40,000 और नशीले इंजेक्शन इस नेटवर्क से जुड़े पाए गए—जिससे पूरे गिरोह का दायरा सामने आ गया।
फर्जी लाइसेंस का सहारा
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने ड्रग लाइसेंस लेने के लिए फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल किया। इसी के जरिए नशे के इस कारोबार को वैधता का कवच दिया गया। मामले में कूटरचना की धाराएं भी जोड़ दी गई हैं।
अन्य आरोपी भी चढ़े पुलिस के हत्थे
इस मामले में सह-अभियुक्त विपुल चौहान को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। रमीशा चौहान की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को और बड़े खुलासों की उम्मीद है।
ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम
एसएसआई नवीन बुधानी, उपनिरीक्षक संजय सिंह, महिला कांस्टेबल इंदु राणा और कांस्टेबल पवन नाथ ने इस कार्रवाई में अहम भूमिका निभाई।
पुलिस का सख्त संदेश
काशीपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि नशे के कारोबार में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। आम जनता से भी अपील की गई है कि ऐसी गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
“आपकी एक सूचना, समाज को नशामुक्त बनाने में निर्णायक साबित हो सकती है।”
फर्जी लाइसेंस की आड़ में चल रहा यह नशे का नेटवर्क अब बेनकाब हो चुका है। “ऑपरेशन प्रहार” के जरिए काशीपुर पुलिस ने यह साफ कर दिया है कि ड्रग माफिया के खिलाफ कार्रवाई अब और तेज और सख्त होने वाली है।
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