“मेरी चेली म्यार घरै पछयांण”: पिथौरागढ़ में अब बेटियों के नाम से होगी घर की पहचान, DM की नई पहल

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पिथौरागढ़: सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में बालिकाओं के प्रति सामाजिक सोच को बदलने और लिंगानुपात (Sex Ratio) में सुधार लाने के लिए जिलाधिकारी आशीष भटगाई ने एक अनोखे अभियान का आगाज किया है। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत अब जिले में “मेरी चेली म्यार घरै पछयांण” (मेरी बेटी, मेरे घर की पहचान) कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है।

🖼️ घर के बाहर लगेगी बेटी के नाम की नेमप्लेट

इस योजना की सबसे खास बात यह है कि जिस घर में बेटी का जन्म होगा, उस घर की पहचान उस नन्ही जान के नाम से जुड़ी होगी:

  • विशेष पट्टिका: महिला एवं बाल विकास विभाग उस परिवार को एक विशेष नेमप्लेट (पट्टिका) उपलब्ध कराएगा, जिस पर बेटी का नाम लिखा होगा।

  • द्वार पर पहचान: यह पट्टिका घर के मुख्य द्वार पर लगाई जाएगी, जो समाज को यह संदेश देगी कि बेटियां ही परिवार का असली गौरव और पहचान हैं।

  • कनालीछीना से शुरुआत: इस अभियान का आधिकारिक शुभारंभ जिले के कनालीछीना विकासखंड से किया जाएगा।

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📉 लिंगानुपात सुधारने की ओर बड़ा कदम

पिथौरागढ़ में बालकों की तुलना में बालिकाओं का अनुपात कम होना प्रशासन के लिए चिंता का विषय रहा है। जिलाधिकारी का मानना है कि:

  1. मानसिकता में बदलाव: जब घर की पहचान बेटी के नाम से होगी, तो समाज में बेटियों को लेकर गर्व की भावना पैदा होगी।

  2. कुरीतियों पर प्रहार: इस भावनात्मक जुड़ाव से कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराइयों पर लगाम लगेगी।

  3. अधिकारों के प्रति जागरूकता: यह पहल बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और उनके अधिकारों के प्रति माता-पिता को अधिक जिम्मेदार बनाएगी।

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🎤 जिलाधिकारी आशीष भटगाई का संदेश

“यह केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक सोच में बदलाव का एक आंदोलन है। हम चाहते हैं कि बेटियां खुद को सुरक्षित और सम्मानित महसूस करें। इस अभियान में जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों का सहयोग अनिवार्य है।”


🤝 सामाजिक भागीदारी की अपील

प्रशासन ने स्वयंसेवी संगठनों, जनप्रतिनिधियों और आम जनता से इस अभियान को सफल बनाने की अपील की है। आने वाले समय में यह योजना जिले के सभी विकासखंडों में लागू की जाएगी, जिससे पिथौरागढ़ की हर ‘चेली’ (बेटी) को अपनी एक विशिष्ट पहचान मिल सके।

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