अचानक बदले रुख से सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल
राजू अनेजा,काशीपुर।सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) की सुई अब नए सवालों की ओर घूमती नजर आ रही है। जिस बयान का सबसे अधिक इंतजार था—ऊधम सिंह नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा का—वह दर्ज किए बिना ही एसआईटी ने जांच की दिशा बदल दी। इस अप्रत्याशित कदम ने मामले को और रहस्यमय बना दिया है।
बीते कई दिनों से एसआईटी काशीपुर में डेरा डाले हुए थी। शनिवार को एसएसपी का बयान काशीपुर में दर्ज किया जाना प्रस्तावित था, लेकिन किन्हीं कारणों से न तो बयान दर्ज हो सका और न ही टीम काशीपुर में रुकी। इसके उलट, एसआईटी ने जांच को दूसरे रुख में मोड़ दिया, जिससे यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर जांच की सुई अब किस ओर घूम गई है।
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने बीते दिनों जसपुर और काशीपुर के रजिस्ट्री कार्यालयों से जमीन से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज एकत्र किए हैं। इन दस्तावेजों के सामने आने के बाद ही जांच का फोकस बदले जाने की चर्चा तेज है। माना जा रहा है कि जमीन सौदों, लेन-देन और संभावित दबाव से जुड़े तथ्य सामने आने के बाद टीम ने प्राथमिकताएं बदली हैं।
इससे पहले गुरुवार को एसआईटी ने मृतक किसान सुखवंत सिंह के घर पहुंचकर पिता तेजा सिंह और इकलौते बेटे गुरसहज के बयान दोबारा दर्ज किए थे। इन बयानों के साथ-साथ जमीन से जुड़े साक्ष्यों को जोड़कर अब एसआईटी पूरे मामले की परत-दर-परत जांच में जुटी है।
शुक्रवार को खराब मौसम भी जांच में बाधा बना। भारी बारिश के चलते टीम की गतिविधियां प्रभावित रहीं और कई अहम कदम टलते चले गए। हालांकि, सूत्र यह भी मान रहे हैं कि मौसम से ज्यादा बड़ा कारण जांच में सामने आए नए तथ्य हैं, जिनकी पड़ताल के लिए एसआईटी ने काशीपुर से हटकर दूसरे पहलुओं की ओर रुख किया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि—
क्या एसआईटी को ऐसे सुराग मिले हैं, जो सीधे किसी और प्रभावशाली व्यक्ति या समूह की ओर इशारा करते हैं?
और क्या एसएसपी का बयान जानबूझकर बाद के चरण के लिए छोड़ा गया है?
फिलहाल एसआईटी की चुप्पी और बदली हुई रणनीति ने यह साफ कर दिया है कि सुखवंत सिंह आत्महत्या मामला अब सिर्फ एक सामान्य जांच नहीं रहा। आने वाले दिनों में जांच की अगली चाल किसके लिए मुश्किलें बढ़ाएगी, इस पर पूरे जिले की नजर टिकी हुई है।
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